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सब्सिडी कम करने के उपाय बताये कैगः प्रणव

सब्सिडी कम करने के उपाय बताये कैगः प्रणव

खाद्यान्नों, पेट्रोलियम और उर्वरक पर बढ़ते सब्सिडी बोझ से चिंतित सरकार ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) से इन उत्पादों पर दी जा रही भारी सब्सिडी में कमी लाने के सुझाव देने को कहा है।

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने महालेखाकारों के 25वें सम्मेलन को शुक्रवार को नई दिल्ली में संबोधित करते हुए कहा कि पेट्रोलियम, उर्वरक और खाद्यान्न पर दी जा रही प्रत्यक्ष और परोक्ष सभी तरह की सब्सिडी से सरकारी वित्त पर काफी बोझ पड रहा है, इससे विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त धन नहीं बच पाता है, ऐसे में मैं चाहता हूं कि कैग इस बारे में सुझाव दे कि सब्सिडी से लाभान्वित लोगों पर कोई प्रतिकूल असर डाले बिना समूचे सब्सिडी खर्च का बोझ कैसे कम किया जा सकता है।

सरकार का सब्सिडी बोझ साल दर साल बढता ही जा रहा है। वर्ष 2008-09 में यह एक लाख करोड़ रुपये को पार कर गया था तो पिछले वित्त वर्ष में एक लाख 31 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया। चालू वित्त वर्ष के बजट में सब्सिडी को एक लाख 16 हजार करोड़ रुपये तक सीमित रखने का लक्ष्य है। सरकार उर्वरक, खाद्यान्न और पेट्रोलियम पदार्थों पर भारी सब्सिडी देती है। कुल सरकारी व्यय का दस प्रतिशत सब्सिडी के रूप में मुखर्जी ने कैग को व्यय की गुणवत्ता पर भी एक रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। सितंबर 2008 में वैश्विक वित्तीय संकट गहराने के बाद सरकार ने विभिन्न परियोजनाओं और विकास कार्यों पर व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि की थी।

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