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‘आरटीआई की आत्मा है पारदर्शिता’

सूचना का अधिकार अधिनियम को हमेशा प्रताड़ना के रूप में देखा जाता है। कई बार यह भ्रमकारी एवं दुखकारी प्रतीत होता है लेकिन पारदर्शिता इसकी आत्मा है। आशा है कि समय के साथ इसका प्रभाव अच्छा होगा।
उक्त विचार बीएचयू रेक्टर प्रो. बीडी सिंह ने व्यक्त किए। प्रो. सिंह केन्द्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अंतर्गत संचालित सचिवालय प्रशिक्षण एवं प्रबंध संस्थान (आईएसटीएम, नई दिल्ली) द्वारा बीएचयू एकेडमिक स्टाफ कालेज में आयोजित दो दिनी ‘सूचना का अधिकार अधिनियम-2005’ विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम सह कार्यशाला में बोल रहे थे।

आईएसटीएम के ज्वाइंट डायरेक्टर प्रो. एमएस कसाना ने कहा कि आरटीआई के जरिए सुशासन की ओर अग्रसर होते हुए भ्रष्टाचार को समाप्त करने में मदद मिलेगी।

आईएसटीएम के उपनिदेशक के. गोविन्दराजुलु ने कार्यशाला के बारे में बताया। मुख्य अतिथि चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. टीएम महापात्रा ने कहा कि ब्रिटिश हुकूमत में कार्यालयीन गोपनियता अधिनियम के चलते लोगों को सूचना नहीं मिल पाती थी। 2005 से आरटीआई लागू होने के बाद स्थिति में काफी बदलाव आया है।

अतिथियों का स्वागत रजिस्ट्रार डा. केपी उपाध्याय व कार्यक्रम का संचालन उपकुलसचिव डा. एसपी माथुर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कालेज के डा. एसके तिवारी ने किया।

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