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पीयू : कॉशनमनी से हो रहा ‘खेल’

पटना विश्वविद्यालय के हॉस्टल के छात्रों के फंड के साथ ‘खेल’ हो रहा है। हॉस्टलों में रूम एलॉटमेंट के समय छात्र-छात्राओं से कॉशनमनी के रूप में पांच सौ रुपए एक्स्ट्रा लिए जाते हैं। हॉस्टल छोड़ने के समय यह पैसा छात्र-छात्राओं को वापस करना होता है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी में बताया है कि 2007-08 में जीडीएस के 10 छात्राओं की कॉशमनी मनी लौटाई गई है तथा 2008-09 में 27 छात्राओं का आवदेन कॉशन मनी के लिए जमा हुआ था। इसमें 14 छात्राओं को चेक मिल गया है। जबकि 13 छात्राओं का चेक अधीक्षक के पास जमा है। गंगा छात्रावास में रहने वाली छात्राओं की कॉशनमनी नहीं लौटाई गई है। आवेदक दीपक प्रकाश सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूछा था कि जीडीएस छात्रावास में 2001 से 2009 तक कुल कितनी छात्राएं रह रही थीं। उसका कोई जवाब नहीं दिया गया। जबकि गंगा छात्रावास में 2009 तक 142 छात्राएं थीं। रही इसकी सूचना आवेदक को दी गयी। इन छात्राओं से 71 हजार रुपये बतौर कॉशमनी जमा हुआ है। डीन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार इस मद में अभी लगभग 17 लाख रुपये से ज्यादा पडम है। इस फंड का इस्तेमाल विश्वविद्यालय के दूसरे कार्यों में किया जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नदवी हॉस्टल के छात्रों से लगभग 55 हजार रुपये बतौर कॉशनमनी लिए गए हैं। जबकि यहां कार्यरत प्राइवेट गार्डों को कॉशनमनी के फंड से 1.25 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। आरटीआई में विवि प्रशासन ने कहा है कि छात्र-छात्राएं कॉशनमनी की वापसी के लिए आवेदन जमा नहीं करते हैं।

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