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तहसील परिसर से हटाए अवैध बूथ

तहसील परिसर में अवैध रूप से चल रही दुकानों को जेसीबी की मद्द से ढ़हा दिया गया। इस दौरान चाय, फोटो स्टेट मशीन, टेलीफोन बूथ, कंप्यूटर राइटर व टाइपिस्ट आदि की पचास से अधिक स्थानों को खाली करवा गया।

इसमें आठ बूथों के अलावा टाइपिस्ट व खाने-पीने का सामान बेचने वाले शामिल थे। इस तोड़फोड़ के बाद यह खुलासा भी हुआ कि तहसील परिसर में कर्मचारियों की मिलीभगत से पचास से अधिक लोग अपना धंधा चला रहे थे।

शुक्रवार को सुबह प्रशासनिक अधिकारियों ने तहसील परिसर में लाइन लगाकर बैठे टाइपिस्ट, चाय की और खाने-पीने की दुकान चलाने वालों से अनुज्ञा पत्र की मांग की। जो लोग परमिशन नहीं दिखा सके उन्हें परिसर से बाहर कर दिया।

कारोबारियों ने इसका विरोध किया। इन लोगों ने आरोप लगाए कि वह तो हर महीने किराया फलां-फलां कर्मचारियों को देते हैं।

अवैध बूथों को हटाने के लिए जेसीबी मंगाई और बूथों को हटा दिया। इनमें विवादित बंद पड़ा सचिन अरोड़ा का बूथ भी जेसीबी ने तहस-नहस कर दिया।

चार साल से तहसील परिसर में टाइपिस्ट सुरेंद्र का कहना है कि प्रशासन ने बूथ अलॉट करने बंद कर रखें हैं। ऐसे में तहसील कर्मचारी ही अवैध रूप से मासिक किराया वसूल करते हैं।

शुक्रवार को प्रशासन ने पहलवानों और जेसीबी की मद्द से टाइपिस्ट और दुकानदारों को हटा दिया। कुछ लोगों का सामान भी तोड़ दिया गया है।

इससे उन्हें नुकसान हुआ है। प्रशासन उचित किराया लेकर उन्हें यहां काम करने की अनुमति दे दे। ताकि लोग बेरोजगार होने से बच सके।

प्रवीन कुमार(उपायुक्त) सुरक्षा के मद्देनजर लघु सचिवालय परिसर से अवैध रूप से सामान बेचने वाले, अवैध रूप से बूथ लगा कर बैठे लोगों को हटा दिया गया है। इनमें एक विवादित सचिन अरोड़ा का बूथ भी शामिल होने का मामला सामने आया है।

पीड़ित ने उन्हें इसकी शिकायत की है कि उसका मामला कोर्ट में विचाराधीन है। यह मामला उनकी जानकारी नहीं है। मामला कोर्ट से जुड़ा होने के चलते उन्होंने इसकी जांच के आदेश जिला राजस्व अधिकारी को दिए हैं।
जिन लोगों को बूथ अलॉट किए गए हैं वे ही परिसर में काम सकेंगे। प्रशासन उन्हें पहचान पत्र आदि बनाकर देने पर विचार कर रहा है।
 

 

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