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ढी़ले नियमों का फायदा उठा रहे स्कूल संचालक

परिवहन विभाग के ढी़ले रवैये का स्कूल संचालक जमकर फायदा उठा रहे हैं। बच्चों को लाने-जाने के लिए स्कूल संचालक अपनी सुविधा के अनुसार बसों का रूट तय करते हैं। बस चालक पुलिस द्वारा निर्धारित किए गए नियमों को भी ठेंगे पर रखते हैं।

मसलन अप्रशिक्षित चालकों को स्कूल बस की कमान सौप दी जाती है। वर्दी व सहायक का पता नहीं रहता। ज्यादातर बसों से फस्ट एड किट भी गायब रहती है।

यातायात पुलिस भी इस पर अंकुश नहीं लगा पा रही। नतीजतन अक्सर दुर्घटना व जाम जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।

शहर के सैकड़ों स्कूल संचालक छात्र-छात्रओं को लाने-ले जाने के लिए बसों का प्रयोग करते हैं। स्कूलों बसों के चालकों के लिए लंबे चौड़े कायदे कानून बना तो दिए गए। लेकिन स्कूल संचालक इसका पालन नहीं करते।

बस संचालक अपने तरीके से न केवल मार्ग निर्धारित करते हैं। बल्कि वेशभूसा व अन्य नियमों की अनदेखी करते हैं। शुक्रवार को भी यह दिखाई दिया। हादसे वाली गाड़ी के चालक ने कोई निर्धारित वर्दी नहीं पहन रखी थी।

बस में प्राथमिक उपचार की भी कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसी कई कमिया हैं। जो स्कूल बस के नियमों को ठेंगा दिखाते हैं। प्रशासनिक नियम भी लचर है। जिला परिवहन अधिकारी के सचिव देवराज के अनुसार बड़ी बसों को क्षेत्र के आधार पर परमिट दिया जाता है।

परमिट में बसों के लिए रूट अथवा ठहराव की जगह निर्धारित नहीं होती। बाकी मामलों ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई कर सकती है। पुलिस व परिवहन विभाग की इस कमजोरी का फायदा स्कूल वाले जमकर उठा रहे हैं।

 

 

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