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नये वित्तवर्ष के भविष्य निधि ब्याज निर्धारण पर फैसला टला

नये वित्तवर्ष के भविष्य निधि ब्याज निर्धारण पर फैसला टला

कर्मचारी भविष्य निधि जमाओं पर 2010-11 के लिए दिए जाने वाले ब्याज पर फैसला शुक्रवार को नहीं हो सका और कर्मचारी यूनियनों के ब्याज दर बढाने के दबाव के चलते इसे टाल दिया गया।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के केंद्रीय न्यासी मंडल की बैठक के बाद श्रम एवं रोजगार मंत्री मल्लिकाजरुन खड़गे ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमने इसके (भविष्य निधि पर ब्याज दर निर्धारण) लिए कुछ और समय लेने का फैसला किया है और इस बारे में वित्त मंत्रालय से विचार किया जाएगा। इसके बाद फैसला किया जाएगा।

कर्मचारी यूनियनें ब्याज दर को 8.5 प्रतिशत से बढाकर 9.5- 10.5 प्रतिशत करने की मांग कर रही हैं। ब्याज दर तय करने के लिए ही शुक्रवार न्यासी मंडल की बैठक हुई थी। सरकारी गणना के अनुसार ईपीएफओ के पास फिलहाल 2.5 लाख करोड़ रुपये का जमा कोष है।

पिछले पांच साल से भविष्य निधि जमाओं पर 8.5 प्रतिशत का ब्याज दिया जा रहा है। मौजूदा दर कायम रखने पर इस साल ईपीएफओ के पास 15.26 करोड़ एपये का अधिशेष रहेगा। लेकिन अगर ब्याज दर बढ़ाकर 8.75 प्रतिशत कर दी जाती है तो ईपीएफओ को 426.23 करोड़ रुपये का घाटा होगा।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर मंडल की तीन माह बाद होने वाली बैठक पर विचार किया जाएगा।  ईपीएफओ के 4.7 करोड़ से अधिक अंशधारक हैं। न्यासी मंडल में कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधि भी होते हैं और यूनियनें 9.5-10.0 प्रतिशत ब्याज दर के लिए दबाव दे रही हैं ताकि अंशधारकों को बेहतर रिटर्न मिल सके।

न्यासी मंडल ने हालांकि उन संयुक्त उद्यम कंपनियों के बांडों में निवेश की अनुमति दे दी है जिनमें सरकार की कम से कम 26 प्रतिशत हिस्सेदारी हो। इस फैसले से इन कंपनियों में लगभग 4,000 करोड़ रुपये का सालाना निवेश होगा।
  
श्रम सचिव प्रभात चतुर्वेदी ने कहा कि हम अधिक आय चाहते हैं -पहले धन निवेश करें और अच्छा रिटर्न लें। लेकिन निजी क्षेत्र में कुछ नहीं। निवेश केवल सरकारी तथा संयुक्त उदयम कंपनियों में करने का फैसला किया गया है क्योंकि हम कर्मचारियों के धन को पूरी तरह सुरक्षित चाहते हैं।

इस फैसले से ईपीएफओ अपने कोष का दस प्रतिशत हिस्सा एलआईसी, ओएनजीसी विदेश जैसी सार्वजनिक कंपनियों की अनुषंगी इकाइयों के संयुक्त उदयम में लगा सकेंगी।

मौजूदा नियमों के तहत निजी क्षेत्र बांड श्रेणी में निवेश केवल आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी तथा आईडीएफसी के बांडों में ही किया जा सकता है। न्यासी मंडल ने इसके साथ ही कर्मचारी जमा सम्बद्ध बीमा योजना के तहत बीमा लाभ को 60,000 रुपये से बढाकर एक लाख रुपये करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।

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