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बिहार : परिसीमन से 10 पुरानी संसदीय सीटें खत्म

आगामी लोकसभा चुनाव में बिहार की 40 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से 10 निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन के चलते समाप्त हो गए हैं और उनके स्थान पर 10 नए संसदीय क्षेत्र अस्तित्व में आ गए हैं। परिसीमन वजह से ही कई संसदीय क्षेत्रों के भौगोलिक स्वरूप में भी भारी बदलाव आ गया है। बिहार की बगहा, बेतिया, मोतिहारी, छपरा, रोसड़ा, बाढ़, बलिया, सहरसा, पटना और बिक्रमगंज संसदीय क्षेत्र समाप्त हो गए हैं। उनके स्थान पर सुपौल, वाल्मीकिनगर, पश्चिमी चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, सारण, उजियारपुर, पटना साहिब, पाटलिपुत्र, जमुई तथा काराकट संसदीय क्षेत्रों का उदय हुआ है। उल्लेखनीय है कि छपरा संसदीय क्षेत्र से पिछले लोकसभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव विजयी हुए थे वहीं बेतिया क्षेत्र के सांसद रघुनाथ झा हैं। चूंकि नए परिसीमन के बाद कई संसदीय सीटों की भौगोलिक स्थिति में भी भारी बदलाव आया है। लिहाजा ऐसी स्थिति में कई दिग्गज नेता भी अब अपने लिए नए निर्वाचन क्षेत्र की तलाश में जुट गए हैं। परिसीमन के बाद आरक्षित सीटों में हुए बदलाव से भी यहां के राजनीतिक दलों में काफी हलचल है। समस्तीपुर तथा गोपालगंज संसदीय क्षेत्रों को जहां सामान्य से सुरक्षित कर दिया गया है, वहीं नवादा और बाल्मीकिनगर संसदीय क्षेत्र सामान्य हो गए हैं। उल्लेखनीय है कि गोपालगंज क्षेत्र से रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के साले अनिरु प्रसाद उर्फ साधु यादव सांसद हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में जहां 40 संसदीय सीटों मंे से सात सुरक्षित थीं, वहीं अब अगामी लोकसभा चुनाव में छह संसदीय सीटें आरक्षित होंगी। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि परिसीमन के बाद होने वाले पहले लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों में व्यापक फेरबदल करेंगे।

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