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सुनहरी रेत पर दो सहेलियां..

सुनहरी रेत पर दो सहेलियां..

यह शो तो आप लोगों ने आठ महीने पहले साइन कर लिया था, लेकिन जब इसका प्रसारण काफी लंबा खिंचा तो आपको चिंता तो हुई होगी?

अंकिता: हर कोई चिंतित था। मुझे ऐसे बुरे अनुभव इससे पहले भी हो चुके थे। एक और बुरे अनुभव का मतलब ये नहीं है कि कुछ अच्छे के लिए मेरे धैर्य की परीक्षा ली जाए।

सुलग्ना : ‘अंबर धरा’ के समाप्त होने के बाद मेरे पास ऑफर्स की कोई कमी नहीं थी। स्वास्तिक नामक एक प्रोडक्शन हाउस के साथ मेरा अभी भी एक अनुबंध चल रहा है। जब तक वो पूरा होता, मुझे भी लग रहा था कि हमारे लिए इंतजार करना बेहतर होगा।

आपको नहीं लगता कि इंतजार करने में एक तरह का रिस्क था?

अंकिता : शो बिजनेस में यह रिस्क तो होता ही है और साथ में धीरज की परीक्षा भी। जब तक कुछ फाइनल नहीं होता, आपको धैर्य से काम लेना ही पड़ता है।

सुलग्ना : हां काफी इंतजार करने के बाद दूसरे किसी शो को मना करने में खतरा तो होता ही है। ऐसा खतरा केवल मेरे लिए नहीं, बल्कि हर कलाकार के लिए बना रहता है।

अंकिता आपके बारे में खबर तो ये भी थी कि आप फॉक्स के लिए शो करने वाली थीं, जिसका नाम था ‘पंख होते तो उड़ जाती मैं’?

हां, ये बात सही है कि मैं वो शो करने वाली थी। मैंने उसके 10 एपिसोड शूट भी कर लिये थे। मैं ही उस शो को सभी जगह प्रोमोट करने वाली थी। फॉक्स के लिए वह सहारा वन का शो था। 

अब तो आप दोनों जैसलमेर के खूबसूरत रेगिस्तान में साथ शूट कर रही हैं। क्या आप दोनों दोस्त भी हैं?

अंकिता : हां, हम दोस्त हैं। मैं इसके जैसी हूं और ये मेरे जैसी। हम दोनों ने अपने राउरकेला कनेक्शन के बारे में खूब बातें की हैं।

सुलग्ना : हां, हम दोनों की बहुत अच्छी पटती है। हम दोनों घंटों साथ काम करते हैं और फिर शॉपिंग के लिए साथ जाते हैं। शुक्र है कि हम लड़ते नहीं हैं।

अमेरिकी टीवी शोज में दोस्ती के मायने बिलकुल अलग हैं, जबकि यहां दोस्ती को अमीरी और गरीबी के चश्मे से देखा जाता है। उदाहरण के लिए ‘उतरन’ में?

अंकिता : हमारा शो ‘उतरन’ जैसा नहीं है। दूसरी बात ये कि भारतीय शोज भारतीय मानसिकता और संस्कृति को दर्शाते हैं। मुङो लगता है कि रिश्ते- नातों को इससे पहले इतना बोल्ड कभी नहीं दिखाया गया।

सुलग्ना : मुझे लगता है कि हमने दो लोगों के आपसी संबंधों के बीच कुछ दिक्कतों और कभी न खत्म होने वाली एक दोस्त पर फोकस किया है।

सुलग्ना क्या आपको नहीं लगता कि आपका शो ‘अंबर धरा’ थोड़े और अच्छे ढंग से समाप्त हो सकता था?

मेरा बस चलता तो मैं उसे बंद ही न होने देती। वैसे भी वह एक बहुत अच्छा शो था और सोनी पर उसने सबसे अधिक टीआरपी पायी थी। यह मैं मानती हूं कि उस शो को और अच्छे ढंग से समाप्त किया जा सकता था।

आप भी तो आर्मी बैकग्राउंड से हैं। क्या कहना चाहेंगी कि एक अलग बैकग्राउंड से आने पर इंडस्ट्री में कोई दिक्कत हुई?

मुझे लगता है कि हम सब मैच्योर हैं, तेज हैं और इंडस्ट्री के चलन को समझते हैं। हम तेजी से होने वाले बदलावों के अनुसार खुद को बदल सकते हैं।

हम लोग काम के संबंध में रोजाना ढेर सारे लोगों से मिलते हैं। तो फिर इसमें किसी तरह की दिक्कत कैसी।

अंकिता क्या आप सहमत हैं?

सहमत हूं। आखिर मैं इसकी सहेली हूं।  

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