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गंगा के व्यवसायिक उपयोग को बंद किया जाए: शंकराचार्य

हरिद्वार में चल रहे महाकुंभ में जहां एक और धर्म व आस्था की बयार बह रही है वहीं साधु संतों के शिविरों में गंगा की शुद्धता व पर्यावरण से संबंधी मुद्दों पर भी चिंतन हो रहा है।

शंकाराचार्य स्वरुपानंद के शिविर में गंगा की अविरलता बनाए रखने के लिए गंगा व सहायक नदियों पर बन रहे बांधों का निर्माण कार्य बंद करने के प्रस्ताव पारित किए गए। इसके अलावा गंगा सेवा अभियान धर्म सभा में शंकराचार्य स्रुपानंद एवं शंकराचार्य निश्चला नंद संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल व अन्य संतों की उपस्थिति में पारित प्रस्ताव में सरकारों से कहा गया है कि भागीरथी, मंदाकनी व अलकनंदा नदियों की धारा देवप्रयाग से गंगा सागर तक अविरल बहनी चाहिए।

इसके अलावा यह प्रस्ताव भी पारित हुआ कि जो परियोजनाएं तैयार हो चुकी है उन्हें भी तीन वर्ष के अंदर इस लायक बनाया जाए जिससे गंगा की अविरल धारा बनें और इसके प्रवाह में किसी प्रकार की बाधा न पहुंचे।

शंकराचार्य स्वरुपानंद के प्रतिनिधि अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि रीवर और सीवर यह दोनों पृथक.पृथक चीजें है इन्हें किया जाए। गंगा में गिर रही गंदगी, चले और अन्य प्रदूषण उत्पन्न करने वाले पदाथरें को भी इसमें डालने से रोका जाए। गंगा में गंदगी डालने वालों के खिलाफ कडे कानून बनाए जाए और गंगा का किसी भी प्रकार से व्स्यवसायिक लाभ न लिया जाए।

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