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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भारी हंगामा, विवादास्पद विधेयक पारित

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भारी हंगामा, विवादास्पद विधेयक पारित

जम्मू एवं कश्मीर विधानसभा में भारी हंगामे के बीच शुक्रवार को अंतर-जनपदीय भर्ती विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया। इस विधेयक के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जम्मू बंद का आह्वान किया है।

इस विधेयक को लेकर राज्य में विवाद पैदा हो गया है। इसके तहत आवेदक अपने पैतृक जिले के अलावा किसी अन्य जिले में नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। इस विधेयक को एक संशोधन के साथ विधानसभा में पारित किया गया, जिसमें अनुसूचित जाति के लोगों के लिए नौकरियों में आठ फीसदी आरक्षण का प्रावधान है।

सदन की बैठक शुरू होते ही राज्य के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री अली मोहम्मद सागर ने विधेयक को संशोधन के साथ विधानसभा में पेश किया। इससे पहले जम्मू एवं कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी (जेकेएनपीपी) सदस्य हर्षदेव सिंह और कांग्रेस सदस्य अशोक कुमार ने विधेयक में संशोधन की मांग की थी।

संशोधन के अनुसार अनुसूचित जाति के लिए नौकरी में आठ फीसदी आरक्षण बना रहेगा, लेकिन अन्य समुदाय के उम्मीदवार अपने जिले के अलावा अन्य जिलों में नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे।

राज्य की मुख्य विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने संशोधन का विरोध किया। इस संबंध में विधानसभा में पीडीपी सदस्य जुल्फीकार चौधरी बोलना चाहते थे, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ सदस्य और पूर्व उप मुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग ने उन्हें बैठने के लिए कहा।

विधानसभा में भारी हंगामे के बीच विधानसभाध्यक्ष मोहम्मद अकबर लोन ने कहा कि उन्होंने विधेयक को ध्वनि मत के लिए पेश कर दिया है, जिसके बाद उन्होंने कहा, ''विधेयक पारित हो गया है।''

विधेयक पारित होने की घोषणा के बाद पीडीपी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। वे अध्यक्ष के आसन तक पहुंच गए और माइक तोड़ने लगे। उधर, भाजपा ने शुक्रवार को इस विधेयक के खिलाफ बंद का आह्वान किया है। शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर जाम लगाया और टायरों में आग लगाई।

राज्य में मुस्लिम बहुल कश्मीर घाटी और हिन्दू बहुल जम्मू क्षेत्र में राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण के अनुसार इस विधेयक का समर्थन और विरोध कर रहे हैं। विधेयक के मुताबिक कोई व्यक्ति अपने जिले के अलावा अन्य जिलों में भर्ती के लिए आवेदन नहीं कर सकता।

जम्मू क्षेत्र के लोग इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं क्योंकि इससे सामाजिक तौर पर पिछड़े लोगों के लिए नौकरियों में आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान के विपरीत है। जम्मू क्षेत्र की 50 लाख की आबादी का लगभग 20 प्रतिशत अनुसूचित जाति के लोग हैं। राज्य की आबादी एक करोड़ से ऊपर है। घाटी में अनुसूचित जाति के लोग नहीं हैं वहां मुस्लिम बहुसंख्या में हैं।

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