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कामगारों के कल्याण में तत्पर श्रमिक शिक्षा बोर्ड

राष्ट्र निर्माण में श्रमिक की अहम भूमिका है उसके श्रम से ही बुलंद इमारतें तामीर होती हैं। श्रमिक किसी भी राष्ट्र के विकास के आधार है और यह आवश्यक है कि श्रमिकों के हितों की रक्षा हो और उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी हो ताकि किसी भी स्तर पर उनका शारीरिक व आर्थिक शोषण न हो।

इसी उद्देश्य से पांच दशक पूर्व भारत सरकार के श्रम एवं रोजागार मंत्रालय के अंतर्गत केंन्द्रीय श्रमिक शिक्षा बोर्ड 16 सितम्बर 1958 को अस्तित्व में आया और कामगारों को शिक्षित करके देश के आर्थिक विकास में वह अहम भूमिका निभा रहा है।

समाज में अनेकों बुराईयों के चलते श्रमिकों का रहन सहन सदैव चुनौतीपूर्ण बना रहता है। ग्रामीण कामगारों को उनमें आत्मविश्वास उत्पन्न करने के मकसद से उन्हें शिक्षित करके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। केंन्द्रीय श्रमिक शिक्षा बोर्ड ने श्रमिकों के विकास व राष्ट्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस संस्थान ने कार्यशक्ति को उर्जावान क्रियाशील. सकारात्मक और गुणोंत्पादक बनाया है। यह हर क्षेत्र संगठित, असंगठित व ग्रामीण परिवर्तन कर रहा है जिससे उनमें सामाजिक व आर्थिक उन्नति परिलक्षित है।

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  • Web Title:कामगारों के कल्याण में तत्पर श्रमिक शिक्षा बोर्ड