DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

तो ढूंढ़िए न घूमने का बहाना

यों ही टहलते हुए ऑफिस आ गया था। सीढ़ियां चढ़ने के लिए बढ़ रहा था, किसी ने टोका, ‘दो मंजिल चढ़नी पड़ेंगी। लिफ्ट से चलें?’ एक बार तो मन पलटियां खाने लगा, लेकिन फिर सीढ़ियों से ही ऊपर चढ़ गया।

मशहूर साइकोलॉजिस्ट नाइजेल बारबर मानते हैं कि घूमने-टहलने से बेहतर कुछ है ही नहीं। घूमिए-टहलिए और तनाव छूमंतर। वह उसके चार बड़े फायदे बताते हैं। सबसे पहले तो यह बिल्कुल मुफ्त है। जिम वगैरह में तो पैसा खर्च करना पड़ता है। दूसरा, यह पूरी तरह प्राकृतिक है। कोई साइड इफेक्ट नहीं। तीसरा, यह मुकम्मल ‘कार्डियोवेसकुलर एक्सरसाइज’ है। चौथे वजन घटाने के लिए उससे बेहतर और सुरक्षित कोई एक्सरसाइज नहीं है।

घूमना या टहलना हमारे लिए बेहद जरूरी है। एक औपचारिक शारीरिक गतिविधि के तौर पर हम समय पर टहलने जा सकते हैं। मसलन, सुबह या शाम को टहल सकते हैं। लेकिन अगर उसे भी हम नहीं कर पाते, तो हमें घूमने-टहलने के लिए बहाने ढूंढ़ने पड़ेंगे। ऐसा बहुत सा वक्त हम गुजारते हैं, जब हम थोड़ा-बहुत टहल सकते हैं।

अगर हमें इस तनाव और दबाव की दुनिया में फिट रहना है, तो घूमने-फिरने के हर बहाने पर काम करना चाहिए। हम इतना तो कर ही सकते हैं कि अगर बहुत ऊपरी मंजिल पर नहीं जाना है, तो सीढ़ियों से ही जाएं। हम खाने पीने की यानी ब्रेड, सब्जी वगैरह लेने पैदल जा सकते हैं। 

गाड़ी को बारबार निकालने की जरूरत नहीं है। अगर बस वगैरह से सफर करते हैं, तो एक स्टैंड पहले उतर कर टहल सकते हैं। लौटते हुए एक स्टैंड बाद से बस पकड़ सकते हैं। बस थोड़ी सी काया को कष्ट देने की जरूरत है। तो ढूंढ़ रहे हैं न घूमने का बहाना! अगर उसका सचमुच आनंद आने लगे, तो ध्यान जैसा है घूमना।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:तो ढूंढ़िए न घूमने का बहाना