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वेब मार्केटिंग

वेब मार्केटिंग मूलत: पारंपरिक मार्केटिंग का ही इंटरनेट रूप है। आमतौर पर मार्केटिंग से जुड़े अवयव जैसे प्रोडक्ट, पैकेजिंग, मूल्य, प्रोमोशन और प्लेस आदि का ही कंप्यूटर आधारित रूप ही वेब मार्केटिंग में होता है। मार्केटिंग का कार्य अंतत: किसी उत्पाद को उपभोक्ताओं तक पहुंचाना ही होता है इस दिशा में वेब मार्केटिंग इंटरनेट का इस्तेमाल एक औजार की तरह करती है।

इंटरनेट पर वेब मार्केटिंग संबंधी साइटें अपनी सहयोगी वेबसाइटों के साथ लिंक और विज्ञापनों के जरिए व्यवसाय करती हैं। इन सहयोगी वेबसाइटों को ग्राहकों को वेबसाइट के जरिए खरीद-फरोख्त करने या उन तक लाने के लिए आर्थिक लाभ होता है। यह आर्थिक लाभ प्रमुख कंपनी को होने वाले लाभ के एक निश्चित हिस्से के रूप में भी हो सकता है। लिहाजा, जिस तरह पारंपरिक मार्केटर को अपने लक्ष्य निर्धारित मार्केट को अपने कार्य के केंद्र में रखता है, वहीं वेब मार्केटिंग में ग्राहकों को वेबसाइट की ओर आकर्षित करना होता है।

यह साइटें किसी कंपनी, वेब मैग्जीनों या ई-टेल कैटालॉग साइट भी हो सकती हैं। प्रकाशन जगत की साइटें मैग्जीनों की तरह सामग्री उपलब्ध कराती हैं, तो वहीं कॉर्पोरेट हाउस साइटें अपने मार्केटिंग लक्ष्यों को केंद्र में रखती हैं और ई-टेल साइटें उत्पाद सीधे ग्राहकों को बेचती हैं।

वेब मार्केटिंग से किसी भी कंपनी के बिजनेस मॉडल को सीधा लाभ पहुंचना चाहिए। उदाहरण के लिए कॉर्पोरेट साइटों पर ब्लॉग या लेख किसी जरूरी विषय पर पढ़ने को मिलते हैं जिनसे कोई अपने लायक जानकारी  ग्राहक हासिल कर सकता है। जिसके बाद वह कंपनी को संपर्क कर सकता है।

उत्पाद सीधे बेचने वाली कई ई-टेल या ई-कॉमर्स साइटें अपने यहां कस्टमर फोरम भी बनाती हैं जिस पर सामान खरीद चुके ग्राहकों के विचार जानकर अन्य कई ग्राहक खरीदारी का हौसला जुटाते हैं। वेब मार्केटिंग के लिए साइटों पर योजनाबद्ध सामग्री होनी चाहिए जिससे कंपनी के बिजनेस मॉडल को लाभ हो और उसकी ग्राहक संख्या बढ़े।

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