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छात्र परिषद के सदस्यों के अंकों में आई गिरावट

कहते है कभी-कभी होम करने में भी हाथ जल जाता है। यह बात एकदम सटीक बैठती है बीएचयू छात्र परिषद के सदस्यों पर जिन्होंने परिषद के माध्यम से छात्र कल्याण में तो दिन रात एक कर दिया लेकिन उनकी खुद की पढ़ाई इसमें पीछे छूट गई है।

इस मामले में छात्र परिषद के सचिव प्रभाकर पाण्डेय सबसे आगे है। संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में आचार्य के छात्र प्रभाकर को दूसरे सेमेस्टर में 92 प्रतिशत अंक मिले थे लेकिन परिषद में शामिल होने के बाद हुई तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा में उन्हें महज 78 प्रतिशत अंक ही मिलें।

प्रबंध शास्त्र संकाय में एमआईबीए की छात्र और परिषद की संयुक्त सचिव एकता सिंघी को द्वितीय सेमेस्टर में 79.8 प्रतिशत अंक मिले थे लेकिन तीसरे सेमेस्टर में घटकर 70 प्रतिशत ही रह गया है। कृषि विज्ञान संस्थान में एमएससी के छात्र अभिषेक श्रीवास्तव को दूसरे सेमेस्टर में 78 प्रतिशत अंक मिले थे लेकिन तीसरे सेमेस्टर में 77 प्रतिशत अंक ही मिलें। विज्ञान संकाय में एमएससी के छात्र प्रशांत सिंह को दूसरे सेमेस्टर में 10 में से 9.3 प्वाइंट मिले थे लेकिन तीसरे सेमेस्टर में घटकर 8.65 प्वाइंट रह गया। इसी प्रकार प्रौद्योगिकी संस्थान में बीटेक के छात्र को पिछली बार 10 में से 9 प्वाइंट मिले थे जो घटकर 8.23 प्वाइंट रह गया।

हालांकि सेमेस्टर सिस्टम में परीक्षा देने वाले एकमात्र संयुक्त सचिव एलएलएम के छात्र कुमार विवेक रंजन के अंकों में इजाफा हुआ है। परिषद ज्वाइन करने से पहले उन्हें 63 प्रतिशत अंक मिले थे जो इस बार बढ़कर 70 प्रतिशत हो गया है। परिषद से जुड़े शोधछात्र भी दबी जुबान से स्वीकार करते है कि उन्हें थीसिस जमा करने में औसत से अधिक समय लगेगा। सामान्यतया: छात्र परिषद के सदस्य प्रतिदिन दो से चार घंटे छात्र-कल्याण से जुड़ी गतिविधियों में लगे रहते है। जाहिर है इसके चलते उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

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