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बीएचयू: दबाव में नहीं जता पाए विरोध

बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में शास्त्री (स्नातक) से निष्कासित तीन में से दो छात्र गुरुवार को पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन के दबाव में विरोध तक नहीं जता पाए। घटनाक्रम के अनुसार शुभम मिश्र (शास्त्री आनर्स धमा्रगम विभाग) और शिवकांत पाठक (शास्त्री आनर्स वैदिक दर्शन विभाग) सुबह लगभग 11 बजे लंका स्थित मालवीय प्रतिमा के निकट निष्कासन के विरोध में अनशन पर बैठ गए थे। प्रतिमा के पास ही स्थित पुलिस बूथ पर तैनात पुलिसकर्मियों ने छात्रों को यह कहते हुए अनशन पर बैठने से मना किया की उन्हें जो करना है परिसर के भीतर करें। इसी बीच विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मी भी मौके पर पहुंच गए और छात्रों को चेतावनी दी की जो भी करना है परिसर के बाहर करें। जिच लगभग आधे घंटे चली। इसी दौरान बीएचयू छात्र परिषद के सचिव प्रभाकर पाण्डेय ने मौके पर पहुंच कर छात्रों को समझा-बुझाकर कर वापस भेजा।

उधर इस मामले में संकाय प्रमुख प्रो. आरसी पण्डा और संकाय प्रवेश समिति के अध्यक्ष प्रो. चन्द्रमा पाण्डेय ने एक विज्ञप्ति के माध्यम से कहा है कि अभ्यर्थियों को आवेदन पत्र व काउंसिलिंग लेटर में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि शास्त्री में प्रवेश के लिए बारहवीं में 50 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है। नियम जानते हुए भी उक्त छात्रों ने प्रवेश के समय समग्र अंकों के खो जाने की बात कहते हुए समय मांगा था। लेकिन उसके बाद संकाय के अध्यापकों से प्रतिशतांक को प्रमाणित नहीं कराया। इस संदर्भ में विदित हो कि अभ्यर्थी को पूर्णतया ज्ञान होता है कि अर्हता पूरी न करने की स्थिति में प्रवेश बिना किसी पूर्व सूचना के स्वत: निरस्त हो जाता है।

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