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नसबंदी फेल, पांच साल बाद भी नहीं मिला हर्जाना

नसबंदी कराने के बावजूद एक महिला ने बेटे को जन्म दिया। स्वास्थ्य विभाग की इस खामी के लिए महिला का पति पिछले चार साल से हर्जाना पाने के लिए चक्कर काट रहा हैं।

लेकिन स्वास्थ्य विभाग उसे उल्टी गिनती पढ़ा रहा हैं। बताया गया है कि इस मामले में नसबंदी संबंधी शासनादेश आड़े आ रहा हैं।

हरसांव निवासी पूरन शर्मा की पत्नी ने वर्ष 2004 में महिला अस्पताल में नसबंदी कराई थी। पूर्ण शर्मा के नसबंदी से पहले दो बेटियां व एक बेटा था। बताया गया है कि दो साल बाद उसकी पत्नी ने फिर एक पुत्र को जन्म दिया।

नसबंदी होने के बाद भी बच्चा होने पर पूरन ने इसकी शिकायत स्वास्थ्य विभाग को की व इस गलती के लिए हर्जाना मांगा। पूरन के मुताबिक उसको स्वास्थ्य विभाग ने आश्वासन दिया था कि उसे इस गलती के लिए हर्जाना दिया जाएगा।

लेकिन आज तक कुछ नहीं दिया गया। उल्टा अब वर्ष 2005 में आए एक शासनादेश को लेकर स्वावास्थ्य विभाग उन्हे उल्टी गिनती पढ़ा रहा है। इसकी शिकायत उन्हेंनों डीएम के साथ मुख्यमंत्री को भी की है।

सीएमओ डा. एके धवन की माने तो नवंबर 2005 में एक शासनादेश जारी किया गया था कि वर्ष 2005 से पहले जिन महिलाओं की नसबंदी फेल हुई है उन्हे किसी प्रकार का कोई हर्जाना नहीं दिया जाएगा।

लेकिन पूरन का कहना है कि शासनादेश आने के बाद उनको पुत्र हुआ। इसके लिए वह स्वास्थ्य विभाग को दोषी मान रहे हैं। लिहाजा मामला शासन स्तर तक पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग इस मामले की दोबारा से जांच कर रहा है। 

 

 

 

 

 

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