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अब डॉक्टर साहब ही बन पाएँगे सहायक प्रोफेसर

अब डॉक्टर साहेब (पीएचडी) की उपाधि के बिना असिस्टेंट प्रोफेसर की कुर्सी नहीं मिल सकेगी। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के 2010 नियुक्ति एवं विनिमय नियमों को सरकार ने हरी झंडी दे दी। इसके बाद हरकोर्ट बटलर प्रौद्योगिकी संस्थान (एचबीटीआई) प्रदेश के सरकारी इंजीनियरिंग कालेजों में नियुक्ति की लाइन में लगे कई गैर पीएचडी धारक रीडरों को झटका लग सकता है।

एआईसीटीई के नियम 2010 के अनुसार ही अब नियुक्ति प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाया जा सकेगा। प्राविधिक शिक्षा विभाग की ओर से एचबीटीआई कानपुर, केएनआईटी सुल्तानपुर, बुन्देलखण्ड अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान झाँसी एमएमईसी गोरखपुर और उत्तर प्रदेश वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। यूपी वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान फिलहाल शासनादेश के नियमों का अध्ययन कर रहा है। एचबीटीआई में अप्रैल के पहले सप्ताह में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। हालांकि शासन की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि अब बिना पीएचडी के असिस्टेन्ट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति नहीं की जा सकेगी। अभी तक इस पद के लिए पीएचडी की योग्यता उन्हीं कालेजों के लिए थी, जिनके सम्बन्धित विभाग एमटेक कोर्स संचालित करते थे। अगर संस्थान में पीएचडी और एमटेक कोर्स नहीं चल रहा है तो एमटेक डिग्री होल्डर भी असिस्टेंट प्रोफेसर बन सकते थे। अचानक नए नियमों की अनिवार्यता के बाद प्रदेश के सरकारी इन्जीनियरिंग कालेजों में नियुक्ति की लाइन में लगे सैकेड़ों टीचरों के सामने योग्यता का संकट खड़ा हो सकता है, जबकि सरकारी कदम के बाद बीटेक की पढ़ाई के लिए क्वालिटी टीचरों का टोटा भी खत्म होने की उम्मीद बढ़ गई है।

योग्यता 2010
प्रोफेसर : पीएचडी और 5 साल असिस्टेंट प्रोफेसर का अनुभव
असिस्टेंट प्रोफेसर : पीएचडी
लेक्चरर : एमटेक
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योग्यता 2006
प्रोफेसर : पीएचडी और 5 साल असिस्टेंट प्रोफेसर
असिस्टेंट प्रोफेसर : पीएचडी या फिर एमटेक (ऐच्छिक)
लेक्चरर : एमटेक
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योग्यता 2003
प्रोफेसर : पीएचडी और पांच साल असिस्टेंट प्रोफेसर
असिस्टेंट प्रोफेसर : एमटेक
लेक्चरर : बीटेक

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