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आरटीई: सरकार पता कर रही कितने शिक्षकों की है जरुरत

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) न सिर्फ 6-14 वर्ष के प्रत्येक बच्चे को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा मुहैया करायेगा बल्कि इससे टीचिंग के क्षेत्र में कैरियर की नईं संभावनाएं भी पैदा होंगी। शासन ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत छात्र नामांकन की तुलना में शिक्षकों की आवश्यकता आकलन करना आरंभ कर दिया। इस बाबत सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशालय की ओर से सभी जिलों को एक प्रपत्र भेजा गया है। जिसमें प्रत्येक प्राथमिक एवं जूनियर विद्यालयों में छात्र नामांकन के अनुसार शिक्षकों की आवश्यकता का आकलन करने को कहा गया है। इसकी रिपोर्ट 15 अप्रैल तक मुख्यालय भेज देनी है। ध्यान रहे कि प्रदेश के किसी भी जिले में मानक के अनुसार छात्र-शिक्षक अनुपात नहीं हैं।

क्या हैं आरटीई के मानक
60 बच्चों वाले प्राथमिक विद्यालयों में 2, 61 से 90 में तीन, 91 से 120 में 4, 121-200 में 5 शिक्षक होने चाहिए। 150 से अधिक बच्चे होने पर 5 शिक्षक और एक प्रधानाध्यापक होंगे। 200 से अधिक बच्चे होने पर एक प्रधानाध्यपक और 1:40 के अनुपात के अनुसार शिक्षक होंगे। जूनियर हाईस्कूल विद्यालयों में प्रति 35 छात्र पर एक अध्यापक होंगे। प्रत्येक क्लास में विज्ञान एवं गणित, सामाजिक विषय और भाषा के अलग-अलग अध्यापक होंगे। जहां से 100 से अधिक छात्र होंगे, वहां एक प्रधानाध्यापक के अलावा 3 अध्यापक प्रति कक्षा 1:35 के अनुपात में होंगे। इसके अलावा कला शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा और कार्यानुभव शिक्षा के लिए अंशकालिक शिक्षक नियुक्ति किये जाएंगे।

जिले की स्थिति
वाराणसी में इस समय 1032 प्राइमरी स्कूल में 3449 और 352 जूनियर हाईस्कूल में 1554 शिक्षक कार्यरत हैं। जबकि प्राइमरी में 22,558 और जूनियर हाईस्कूल में 16,489 बच्चों का नामांकन हैं। जिले के प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के मुताबिक छात्र-शिक्षक अनुपात नहीं है। प्राथमिक विद्यालयों में यह 1:50 का है। जूनियर विद्यालयों में स्थिति और खराब है। जबकि इसी साल 221 शिक्षक रिटायर हो जायेंगे। जिले में कई प्राथमिक विद्यालयों में सिर्फ एक ही शिक्षक के बदौलत चल रहे हैं।

शिक्षकों की भयंकर कमी
जाहिर है शिक्षा का अधिकार अधिनियम के मानक के मुताबिक प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में शिक्षकों की भयंकर कमी हैं। बगैर नई भर्तियों के मानक पूरा करना संभव नहीं हैं। यही वजह है कि सराकार शिक्षामित्रों को प्रशिक्षित कर स्थायी शिक्षक बनाने की योजना पर विचार कर रही है।

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