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इंटर के बाद छात्रों का झुकाव बढ़ा प्रोफेशनल कोर्स पहली पसंद

इंटरमीडिएट करने के बाद बीबीए करूं या बीसीए? अगर मासकॉम करूंगा तो कितना एक्सपोजर मिलेगा? क्या इंडस्ट्रीयल माइक्रोबॉयोलॉजी में जाना बेहतर होगा? एमबीए करने के लिए ग्रेजुएशन में बीकॉम करना कितना अच्छा होगा? इंटरमीडिएट की परीक्षा दे रहे छात्र-छात्राओं के दिमाग में अभी से ही ऐसे सवाल घूम रहे हैं। चूंकि आजकल हर स्ट्रीम में स्पेशलाइजेशन की डिमांड है। इसलिए छात्रा-छात्राओं का रुझान बीए, बीकॉम या बीएससी जैसे ट्रेडिशनल कोर्स की बजाय प्रोफेशनल कोर्स की ओर बढ़ रहा है। छात्र-छात्राओं का कहना है कि पीजी में स्पेशलाइजेश से बेहतर है कि ग्रेजुएट लेवल पर ही स्पेशलाइजेश किया जाए। जबकि ट्रेडिशनल कोर्स करने वाले छात्रों का कहना है कि जब प्रोफेशनल कोर्स करना ही होगा तो बाद में भी कर लेंगे।

हमेशा मौजूद रहते हैं अवसर
मगध महिला कॉलेज की छात्रा निक्की का मानना है कि वोकेशनल कोर्सेज के काफी फायदे हैं। इसमें प्लेसमेंट भी होते हैं। जिससे युवाओं को अपने पसंद के क्षेत्र में काम करने का मौका मिलता है। साथ ही इसकी फीस भी ज्यादा नहीं होती है। जो मध्यमवर्गीय छात्रों के लिए अच्छा है। जबकि बीसीए कर रही विनीता का मानना है कि प्रोफेशनल कोर्स से नौकरी के दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं। हालांकि बिहार में जॉब देने वाली कंपनियों की कमी से हमें पढ़ाई के बाद दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। लेकिन, इतना तय रहता है कि नौकरी की कमी नहीं होती।

कई ऑप्शन मिलते हैं
बारहवीं की परीक्षा दे रहे अमरेंद्र कुमार का कहना है कि वे फाइनेंस में एमबीए करेंगे। उनका कहना है कि जब हमारा टारगेट क्लीयर है तो फिर क्यों जाएं किसी और फिल्ड में। क्यों करूं में बीकॉम। इसलिए मैं फाइनेंस में बीबीए करना चाहता हूं। ताकि पीजी में नॉलेज का प्लेटफॉर्म तैयार मिले। कंकड़बाग के रहने वाले चंदन कुमार सिंह भी एमबीए करना चाहते हैं। लेकिन वे बीकॉम से ही ग्रेजुएशन करेंगे। चंदन का मानना है कि बीबीए के बजाय बीकॉम के दौरान ही वे एमबीए एंट्रेस की तैयारी करेंगे। इसके लिए पर्याप्त समय मिलेगा। ग्रेजुएशन के बाद अगर मूड करेगा तो स्ट्रीम भी बदल लेंगे।

राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों ने खोले ब्रांच
पटना में राष्ट्रीय स्तर के कई शैक्षणिक संस्थानों ने अपने ब्रांच खोले हैं। इनमें आईआईटी, चाणक्या इंस्टीटय़ूट ऑफ लॉ, चंद्रगुप्त इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट, निफ्ट, आदि शामिल हैं। इसके अलावा राजधानी के कॉलेजों में भी प्रोफेशनल कोर्सेज मसलन बीबीए, बीसीए, मास कॉम, फैशन डिजाइनिंग, फंक्शनल इंग्लिश, इंडस्ट्रीयल माइक्रोबायलॉजी, एडवरटाइजिंग एंड सेल्स की पढ़ाई होती है।

प्लानिंग जरूरत के अनुसार
लालजी रिसर्च के क्षेत्र में जाना चाहते हैं। वे कहते हैं कि इस समय बोयो टेक्नोलॉजी में स्कोप सबसे अच्छा है। बीएससी बायोटेक्नोलॉजी से करने के बाद मैं इसी से एमएससी करूंगा। कंप्यूटर के क्षेत्र में कॅरियर बनाने की तैयारी कर रही अमृता का भी बीसीए करना चाहती है। अमृता का कहना है कि ट्रेडिशनल कोर्स के बजाय प्रोफेशनल कोर्स में ज्यादा एक्सपोजर मिलता है।

फैशन डिजाइनिंग भी है अहम
पूनम मिश्र ने फैशन डिजाइनिंग को कॅरियर चुना है। कोर्स पूरा करने के बाद वे कुछ दिन किसी ब्रांडेड कंपनी में डिजाइनर के रूप में नौकरी करना चाहती हैं। फिलहाल वे बीएफटेक कर रही हैं। बोरिंग रोड चौराहा स्थित ‘अल्ट्रा फैशन इंस्टीट्यूट’ के फैशन-डिजाइनर अमरजीत कहती हैं- युवा गंभीरता के साथ इस क्षेत्र से जुड़ रहे हैं। राजधानी में सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में फैशन डिजाइनिंग के डिग्री, डिप्लोमा और प्रोफेशनल पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। गांधी मैदान स्थित उद्योग भवन में निफ्ट ने अपनी शाखा खोली है तो बोरिंग रोड, किदवईपुरी, डाकबंगला रोड जैसे इलाकों में फैशन डिजाइनिंग टेक्नोलॉजी के प्राइवेट संस्थान खुले हैं। सरकारी पॉलिटेकनिक में भी फैशन-डिजाइनिंग पाठ्यक्रम संचालित हो रहे है।

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