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स्कॉलरशिप से पेटेंट होगा वकालत में करियर

देश में मिलने वाली स्कॉलरशिप-एनएलएसआईयू स्कॉलरशिप, हेमंत नरिचानिया स्कॉलरशिप, ललित भसीन स्कॉलरशिप एवं शंकर रामा मेमोरियल ट्रस्ट स्कॉलरशिप। विदेशों में लॉ से संबंधित स्कॉलरशिप- अमेरिकन बार एसोसिएशन, यूनिफिकेशन ऑफ प्राइवेट लॉ (यूएनआईडीआरओआईटी) रोम आदि हैं। कुछ प्रमुख वेबसाइट भी निम्न हैं- www.nelliemae.com, www.accessgroup.org लॉ एवं एचआर मिनिस्ट्री से भी सहायता मिलती है।

कब कर सकते हैं कोर्स
इसमें प्रवेश की पहली सीढ़ी 10+2 के बाद ही मिल जाती है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) द्वारा प्रायोजित पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड एलएलबी कोर्स में छात्रों को बुनियादी चीजों को लेकर स्पेशलाइजेशन तक की जानकारी दी जाती है, जबकि ग्रेजुएशन  के पश्चात एलएलबी (तीन वर्षीय, पार्टटाइम/फुलटाइम) तथा उसके बाद एलएलएम (2 वर्षीय) में दाखिला आसान हो जाता है। बीए एलएलबी में छात्र को किसी स्पेशलाइज्ड फील्ड जैसे कॉरपोरेट लॉ, पेटेंट लॉ, क्रिमिनल लॉ, साइबर लॉ, फैमिली लॉ, बैकिंग लॉ, टैक्स लॉ, इंटरनेशनल लॉ, लेबर लॉ, रीयल एस्टेट लॉ आदि में विशेषता हासिल करनी होती है।

कोर्स के प्रश्चात छात्र को एक से दो वर्ष तक इंटर्नशिप या किसी वरिष्ठ अधिवक्ता के सहायक के रूप में काम करना पड़ता है। उसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया या अन्य किसी संस्था में रजिस्ट्रेशन कराया जाता है।

आवश्यक स्किल्स
इस प्रोफेशन की सबसे खास बात यह है कि इसमें छात्र जीवन से ही जुझारू प्रवृत्ति अपनानी पड़ती है। किताबों एवं घटनाओं से निरंतर जुड़े रहना किसी भी प्रोफेशनल को आगे ले जाता है। रिसर्च एवं एनालिसिस के आधार पर ही किसी विषय पर कमांड हासिल हो सकती है, इसलिए मेहनत करने से भागे नहीं।

एक एडवोकेट के रूप में आपको मृदुभाषी, वाकपटु, मेहनती तथा लीडर जैसे गुण भी अपनाने पड़ते हैं। महज परीक्षा पास करने से ही एक अच्छा वकील नहीं बना जा सकता, बल्कि तार्किक, धैर्यवान, एकाग्रता, बहस करने की क्षमता, आत्मविश्वास तथा पिछले केसों के बारे में अच्छी जानकारी रखने वाला भी होना चाहिए। आपके पास एक अच्छी लाइब्रेरी तथा किताबों का संग्रह भी आवश्यक है।

एंट्रेंस एग्जाम का स्वरूप
ज्यादातर बड़े संस्थानों में दाखिला एंट्रेंस एग्जाम के ही जरिये मिलता है। यह एक ऑब्जेक्टिव टाइप पेपर होता है, जिसमें रीजनिंग, जनरल अवेयरनेस, न्यूमेरिक एप्टीटय़ूड, लीगल एप्टीटय़ूड एवं राजनीति शास्त्र से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। थोड़ी- सी मेहनत से ही उम्मीदवार इसमें सफलता हासिल कर सकता है, पर लॉ के क्षेत्र में जाने का फायदा तभी है, जब आपकी इसमें विशेष रुचि हो। दिल्ली विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी ने अपनी प्रवेश तिथियां घोषित कर दी हैं, जबकि 2008 के पश्चात सात नेशनल लॉ स्कूल मिल कर कॉमन लॉ एडमिशन टैस्ट का आयोजन करते हैं, जिसके पश्चात अंडरग्रेजुएट व पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम में प्रवेश मिलता है।

प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाएं
विगत कुछ वर्षो से लॉ के प्रोफेशन में काफी बदलाव आया है। इसमें अच्छे छात्रों के चयन के लिए लगभग सभी बड़े संस्थानों ने एंट्रेंस एग्जाम की प्रथा शुरू कर दी है। इसलिए अच्छे लॉ कॉलेज में पढ़ने की संभावना तभी बन पाएगी, जब एंट्रेंस एग्जाम पास करेंगे। कुछ एंट्रेंस एग्जाम एवं उसे कराने वाले संस्थान निम्न हैं-

क्लैट (कॉमन लॉ एडमिशन टैस्ट)
एसएसएलसी, पुणे (सिम्बायोसिस सोसायटी लॉ कॉलेज)
फैकल्टी ऑफ लॉ, दिल्ली यूनिवर्सटिी
क्यूएलटीटी (क्वालिफाइड लॉयर्स ट्रांसफर टैस्ट)
एमिटी लॉ स्कूल, दिल्ली

कैसे लें लॉ कॉलेज की जानकारी
जहां एक ओर नामी लॉ कॉलेजों की भरमार है, वहीं फर्जी संस्थानों की भी कमी नहीं है। ऐसे फर्जी संस्थान विज्ञापन के माध्यम से अपने संस्थान का 100 प्रतिशत प्लेसमेंट दर्शाते हैं, इसलिए एडमिशन से पूर्व उस संस्थान की सत्यता की जांच-परख अवश्य कर लें। कोई भी इच्छुक छात्र, जो लॉ में अपना करियर बनाना चाहता है या वह संस्थान के बारे में जानकारी हासिल करना चाहता है तो ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ उसकी मददगार साबित हो सकती है। यह संस्थान कानूनी शिक्षा एवं व्यवसाय के साथ-साथ कानूनों में सुधार लाने के लिए अपने परामर्श भी देता है। इसकी वेबसाइट निम्न है- www.barcouncilofindia.nic.in

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