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किसान काल सेंटरों से मिल रही हैं खेती-बाड़ी की जानकारियां

खेती बाड़ी संबंधी समस्याओं और जिज्ञासाओं का सामधान स्थानीय भाषा में सुझाने के लिए देश भर में स्थापित विशेष काल सेंटरों में किसानों के फोन की संख्या बढ़ रही है पर काल का स्तर अब भी कम है।

किसान काल सेंटरों से जुड़े केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकारी इन टाल फ्री फोन सूचना केंद्रों का राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रचार प्रसार कराने की जरूरत पर बल देते हैं ताकि इन केंद्रों के बारे में अधिक से अधिक किसानों को जानकारी दी जा सकें। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय भाषाओं में शुरू किए गए किसान काल सेंटर की लोकप्रियता बढ़ रही है लेकिन व्यापक प्रचार तथा कनेक्टिविटी जैसी दिक्कतें इसके व्यापक प्रसार में बाधा बनी हुई है।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के शासन के दौरान जनवरी 2004 में शुरू किये गये इन किसान काल सेंटर की संख्या 25 केंद्र है और इनकी पहुंच प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश तक है।

कृषि मंत्रालय में अतिरिक्त आयुक्त और किसान काल सेंटर से जुड़े डा़ यम जे चंद्र गौड़ा ने भाषा से कहा कि शुरुआत में जहां देश भर में 13 किसान काल सेंटर थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 25 हो गयी है। काल करने वाले किसानों की संख्या में भी इजाफा हुआ है लेकिन व्यापक प्रचार और कनेक्टिविटी के अभाव में इसका लाभ सभी कृषक नहीं उठा पा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि केवल दूरदर्शन के कृषि दर्शन कार्यक्रम के जरिये दी केसीसी का प्रचार किया जाता। पर्याप्त कोष नहीं होने के कारण निजी टेलीविजन चैनल और एफएम रेडियो पर इसका कोई प्रचार नहीं किया जा रहा है।

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