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दिल्ली में अपहृत हुए ज्यादातर बच्चें अन्य राज्यों के

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में होने वाली अपहृरण की घटनाओं के बारे में हुए एक अध्ययन में पता चला है कि इस प्रकार की ज्यादातर घटनाओं में राजधानी के आसपास के राज्यों के गरीब और झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को निशाना बनाया जाता है।
   
बचपन बचाओ आंदोलन नामक एक स्वयंसेवी संस्था की ओर से कराए गए इस अध्ययन में बताया गया है कि अपहरणकर्ताओं का निशाना सबसे अधिक पांच से छह साल के बच्चों होते हैं।
 
संस्था के अधिकारियों ने बताया कि उनकी संस्था बाल अधिकारों के लिए 1980 से काम कर रही है। संस्था द्वारा कराए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि लापता बच्चों में ज्यादातर लड़कियां थीं।
  
उन्होंने बताया कि अध्ययन के आधार पर यह पता चला है कि अपहृत बच्चों से जबरन मजदूरी कराई जाती है या फिर उनका यौन शोषण किया जाता है।
   
उल्लेखनीय है कि 300 के सैम्पल आकार वाले इस अध्ययन में पाया गया कि अपहरण किए गए बच्चों में 80 प्रतिशत दूसरे राज्यों के थे और इन 80 प्रतिशत में से 70 प्रतिशत सिर्फ बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बच्चों थे।
   
संस्था के आंकड़ो के मुताबिक इन अपहृत बच्चों में 80 प्रतिशत अनुसूचित जाति़, जनजाति या अन्य पिछड़े वर्गों के थे और इनमें से 90 प्रतिशत बच्चों झुग्गियों में रहते थे।
   
संस्था के अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली पुलिस की ओर से मुहैया कराए गए 2009 के आंकड़े के मुताबिक राजधानी में देश के सबसे अधिक लापता बच्चें हैं। दिल्ली में औसतन 19 बच्चें गायब हो जाते हैं, जिसमें से छह ऐसे होते हैं जिनका बाद में कुछ अता पता नहीं चल पाता।

उल्लेखनीय है कि बचपन बचाओ आंदोलन ने चार अप्रैल से लापता बच्चों के लिए जागरूकता अभियान की शुरुआत की है।
   
अधिकारियों ने कहा कि इस अभियान में दक्षिण और दक्षिण पूर्वी दिल्ली से आंकड़े जुटाने पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा, साथ ही इन इलाकों में जन निगरानी समितियों का भी गठन किया जाएगा।
   
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत पूर्व में मजदूरी के काम में लगे बच्चें संगीत और नाटक प्रस्तुत करेंगे।

   
बचपन बचाओ आंदोलन के अध्यक्ष आर एस चौरसिया ने कहा, हर दूसरे दिन हमारे कार्यालय में हैरान परेशान अभिभावक अपने बच्चों का पता करने के लिए आते हैं। हम ऐसे अभिभावकों को वैधानिक सहायता मुहैया कराते हैं।
   
उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं पर निगरानी के लिए स्थानीय निवासियों को सचेत रहना चाहिए और ऐसी किसी भी घटना में उन्हें तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

 

 

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