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दो टूक (08 अप्रैल, 2010)

कोंकण रेलवे और दिल्ली मेट्रो के जनक ई. श्रीधरन पर समूचे देशवासियों को नाज है। दिल्ली को उन्होंने शानदार परिवहन व्यवस्था के अलावा काम-काज की ऐसी संस्कृति दी, जिसके दर्शन अपने देश में विरले ही होते हैं। मेट्रो के पहले फेज में गाड़ियां तय समय से पहले दौड़ने लगीं तो लोग हैरत में पड़ गए।

लेट-लतीफी आज भी सरकारी योजनाओं की खास पहचान है। श्रीधरन की कर्मठता और आत्मबल का ही कमाल है कि 78 वर्ष की उम्र में वह नौजवानों जितने सक्रिय हैं। विदेशों में नौकरी के ख्वाब देखने वाले नौनिहालों को केरल के गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़े मेट्रो मैन से सीख लेनी चाहिए। फिलहाल हम उनके जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं।

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