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भूखे क्यों रहते हो यार

ये क्या यार! शाम चार बजे लंच कर रहे हो। उनके साथी ने  टोका। उन्होंने थका सा जवाब दिया, ‘क्या करूं यार वक्त ही नहीं मिला। सुबह जल्दी निकल गया था। बाद में काम में उलझा रहा।’
 
अमेरिका की मशहूर वेलनेस एक्सपर्ट डॉ. ऐन कुल्ज का मानना है कि लंबे वक्त तक भूखे रहना शरीर के लिए अच्छा नहीं है। डा. ऐन मानती हैं कि देर तक भूखे रहना और जब मिले तो ठूंस-ठूंस कर खाना। दोनों ही अतियां हैं। उससे आपका पूरा सिस्टम ही बिगड़ सकता है।
 
देर तक भूखे रहने से हमारा ब्लड शुगर का स्तर गिर जाता है। उसका मतलब है कि हमारे दिलोदिमाग को जो खुराक चाहिए, वह हमें नहीं मिल पाती है। जाहिर है उसका असर हमारे मन और शरीर दोनों पर पड़ेगा ही। ऐसा करने से हमें थकान महसूस होती है।

हमें अपने खानपान का इस तरह ध्यान रखना चाहिए कि यह थकान हो ही नहीं। डॉ. ऐन मानती हैं कि हमें तीन बार तो खाना ही चाहिए। उसके अलावा बीच-बीच में कुछ कुछ हल्का-फुल्का खाते रहना चाहिए। तो भूखे नहीं रहना, थोड़ा-थोड़ा खाते रहना है। बहुत ज्यादा नहीं खाना है। ठूंसना तो पूरी तरह मना है। और लंबे वक्त तक आप अगर भूखे हैं, तो बहुत संभल कर खाने की जरूरत है।

अपने यहां तो अन्न को ब्रह्मा ही मान लिया गया। हमें बचपन से ही सिखाया जाता है कि अन्न का निरादर मत करो। हमारा शरीर भी तो आत्मा को धारण करता है। उसके साथ भी हम कोई गड़बड़ नहीं कर सकते।
देर तक भूखे रहना अगर शरीर का निरादर है तो ज्यादा खाना भी अन्न का निरादर है। हमें अन्न उतना ही लेना चाहिए जितनी हमारी जरूरत है। जरूरत से ज्यादा लेना किसी न किसीकी बर्बादी है। बर्बादी किसीकी हो, वह नहीं होनी चाहिए। तो भूखे नहीं रहना है यार।

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