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हम भी, तुम भी, सब दोषी हैं

आशुतोष का लेख ‘वंशवाद में जकड़ा भारतीय लोकतंत्र’ राजनीतिक उद्योग की परिभाषा को समझने में सहायक है कि किस तरह लोकतंत्र के नाम पर राजनीतिक उद्योग को बढ़ावा दिया जा रहा है। राजनीति में वंशवाद की बीमारी कोई नई नहीं है? नेहरु गाँधी परिवार की राजनीति के समय से इसकी आहट को समझा जा सकता है। आज राजनीति में आना हर उस व्यक्ति का सपना है जो पैसा और ताकत दोनों पाना चाहता है, उस व्यक्ति का नहीं जो देश की और जन की सेवा करना चाहता है। समाज में एक धारणा बन चुकी है की राजनीति में आना है तो पैसों के बिना ये संभाव नहीं है और आने के बाद पैसा आना ही संभव है। और इस बात से इनकार भी नहीं किया जा सकता। लेकिन राजनीति के इस बदले हुए स्वरूप के लिए जिम्मेदार कौन है? वो लोग जो इस तरह की राजनीति करते हैं या हम लोग जो इस तरह की राजनीती करने देते हैं।
इरशाद खान

पाकिस्तान की खुशी
सानिया और शोएब मामले पर हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर जी का लेख पढ़ा। उनके विचार से सानिया और शोएब को काफी हिम्मत मिलेगी। यह अच्छी बात है कि हर प्यार करने वाले को उनको अपना जहां मिलना चाहिए लेकिन विश्वास की नजर बराबर होनी चाहिए। भारतीय उपमहाद्वीप में लड़के वाले को आज भी ज्यादा सम्मान की नजर से देखा जाता है इसलिए शायद पाकिस्तान के लोगों में सानिया-शोएब की शादी को एक जीत की तरह देखा जा रहा है। कुछ बुद्धिजीवियों का कहना है कि यह शादी भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को शायद नया आयाम दे लेकिन यह आयाम तब कायम हो पाएगा जब विश्वास की कामना दिल से हो।
हिदायतुल्लाह खान ‘राजा’, तिलकखंड, गिरि नगर, नई दिल्ली

यह कैसी सरकार
पेट्रोल-डीजल की कीमतें तो हर तीसरे माह बढ़ानी तय है। कुल मिलाकर यूपीए सरकार अभी तक महंगाई को रोकने में फेल हुई है और आगे भी इससे ऐसी ही उम्मीदें हैं। यह आम तो क्या, खास आदमी की भी सरकार नहीं है।
दिनेश चौहान

अनर्गल खबरों का मीडिया
इन दिनों इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सुर्खियां बटोरने और परोसने की होड़ लगी है। समाचारों के अर्थ का अनर्थ कर बेवजह तूल दी जाती है। सयंम और नियम तो इन खबरियां चैनलों के लिए कुछ अर्थ ही नहीं रखता। मीडिया अनुशासनविहीन हो गया है। मेट्रो पर हादसा होता है और तूल पकड़ लेता है। पब्लिक स्वयं अनुशासित नहीं है। जब वे स्वयं उतरते और चढ़ते अनुशासन का पालन नहीं करते हैं तो जिम्मेदारी किसको सौंपी जाए। ऐसे हादसे तब तक होते रहेंगे जब तक लोग एक दूसरे को अनुशासित स्वयं न करें। और मीडिया पैर उचका कर समाचार की एक ही पंक्ति को कई दिन तक दोहराते हैं। अभी सानिया मिर्जा की शादी की घोषणा हुई तो भी मीडिया ने बवाल पैदा कर दिया है।
गिरधारी लाल

गेम का बहाना
कॉमन वेल्थ गेम्स के नाम पर गरीबों को परेशान किया जा रहा है? दिल्ली का बजट आने से पहले ही इस बात से परदा उठना शुरू हो गया था कि भारत का दिल कहे जाने वाले दिल्ली में गरीबों का हाल बुरा होगा। बजट में सरकार ने कोई सेक्टर ऐसा नहीं छोड़ा जहां आम जनता अपनी बचत के लिए कुछ सोच भी सकें। बात चाहे खाने के वस्तुओ की करें, कपड़ों की हो या फिर घूमने-फिरने की। हर जगह जीना दूभर हो गया है। कामनवेल्थ खेलों का आयोजन आम लोगों के पैसे से होगा। लेकिन क्या इसके ईनाम का हिस्सा इन लोगों को मिलेगा? इस बात का जिक्र कहीं नहीं है।
सैयद ए जे सादी

युवा क्रिकेटरों के लिए तोहफा
आईपीएल एक नई शुरुआत लेकर आया है। यह हमारे देश के युवाओं के लिए जोश पैदा करने का काम करेगा। इसलिए हमारे देश को हरसंभव इसको बढ़ावा देना चाहिए। यह खेल के प्रति युवाओं में दिलचस्पी बढ़ाएगा।
मुन्ना सिंह

नशे में फंसे बच्चे
दिल्ली में नशे की बुरी आदत से अवयस्कों को दूर रखने के लिये प्रशासन ने पान, तंबाकू और सिगरेट बेचने वालों के लिये 18 साल से कम आयु के युवको को नशे से संबंधित पदार्थ न बेचने का प्रावधान बनाया है, लेकिन कुछ विक्रेता अपनी बिक्री बढ़ाने के लिये प्रशासन के इस नियम को भी ताक पर रख रहे हैं। नशीले पदार्थ बेचने वाली ऐसी कई अस्थायी दुकानें तो स्कूलों के आस पास भी मौजूद हैं जहां से 18 साल से कम उम्र के छात्र आसानी से नशीले पदार्थ खरीद कर बेरोकटोक नशा करते हैं। हालांकि 18 साल से कम आयु के युवाकों को नशीले पदार्थ बेचने के साथ साथ सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करना भी प्रशासन ने पूरी तरह वर्जित किया हुआ है। लेकिन दोनों में से कोई भी नियम लागू होता नही दिख रहा है।
ओमप्रकाश प्रजापति, ई-4/323 नंदनगरी दिल्ली-93

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