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खाने पर दें ध्यान

आजकल जिस तरह की व्यस्त जीवनशैली में लोग रहते हैं उसमें खानपान को लेकर बरती गई थोड़ी सी भी लापरवाही कई बार बहुत महंगी पड़ जाती है। इसलिए यह जरूरी है कि सावधानी से खाने-पीने की चीजों का चुनाव करें। विभिन्न पोषक तत्व लेना बेहतर होता है जिनमें कम कैलोरी वाला खाना, साथ ही पर्याप्त मात्र में फाइबर, खनिज और विटामिनयुक्त चीजें खाने से आप गैरजरूरी शारीरिक असंतुलन से बच सकते हैं।

- फलों और सब्जियों में विटामिन, खनिज और फाइबर की अधिकता होती है और उनमें कैलोरी की मात्र भी कम होती है। विभिन्न प्रकार के फलों और सब्जियों को खाने से आपका रक्तचाप और वजन नियंत्रित रहता है। आती हुई गर्मियों को देखते हुए अपनी खुराक को हल्का रखें।

- किसी एक तेल से आपको सारे फैटी एसिड एक साथ नहीं मिल सकते। ऐसे में कुछ पैष्टिक तेलों को एक साथ मिलाकर खाएं।

- हफ्ते में कम से कम दो बार मछली खाएं। हालिया अध्ययन बताते हैं कि तैलीय मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं (उदाहरण के तौर पर सैल्मन, ब्लैक पॉमफ्रेट, हिल्सा, ट्राउट) से हृदय की धमनियों से जुड़ी बीमारियां कम हो जाती हैं। प्लैट मैथड काफी लाभकारी होता है।

उदाहरण के तौर पर आप आधी आधी प्लेट को फल और सब्जियों से भर लें। फल और सब्जियों का सेवन करते समय सावधानी बरतें, साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि वह हरी, पीली, लाल और नारंगी हो। उसमें अन्य चीजों के अलावा टमाटर, मूली, फूलगोभी भी रख लें तो बेहतर रहेगा।

साथ ही विभिन्न अनाजों का मिश्रण या स्टार्च युक्त सब्जियां जैसे कि पास्ता या मक्का, दाल और कम फैट वाला प्रोटीन जैसे बिना चर्बी वाला मांस, मछली, मुर्गा, सोयाबीन का पनीर और कम फैट डेयरी (दही, पनीर, दूध) का सेवन करें।

- स्वास्थ्यवर्धक खाना और पानी पीने से कार्डियोवास्कुलर रोगों में आराम मिलता है। न्यूट्रिशन के अलावा विभिन्न रंग, स्वाद, आकार, खाना बनाने की प्रक्रिया, खाने का तापमान पर भी निर्भर करता है। वहीं खाने में पड़ने वाले मसालों पर भी उनका प्रभाव निर्भर करता है। एक ही बार बहुत सारा खाने से बेहतर होगा कि खाने को अलग-अलग समय पर शारीरिक जरूरतों के मुताबिक ही खाएं। 

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