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डिवीडेंड और टैक्स

निवेशक को मिलने वाला डिवीडेंट टैक्स फ्री होता है। हालांकि यह इंडीविजुअल के अनुसार अलग-अलग होता है। कई बार लोग प्रश्न उठाते हैं कि मिलने वाला डिवीडेंड तो टैक्स फ्री है, लेकिन ब्याज पर टैक्स लगता है। इसका सीधा सा जवाब यह है कि ब्याज को खर्च माना जाता है और डिवीडेंड को इंडीविजुअल का लाभ।

वहीं दूसरी बात ये हैं कि यदि कंपनी अपनी आय, जिसमें डिवीडेंड भी शामिल हैं, पर टैक्स अदा कर चुकी है,तो उसके बाद डिवीडेंड पर टैक्स लेने से यह दुगना कर हो जाएगा। इसी वजह से 1997 में डिवीडेंड को टैक्स फ्री कर दिया गया था।

अभी कुछ दिनों पहले कई कंपनियों जैसे कि डाबर, फाइनेंसियल टेक्नोलॉजी, डाबर और क्रांपटन ग्रीव्स आदि और पीएसयू सेल, गेल, नालको ने अपने शेयरधारकों के लिए कर मुक्त डिवीडेंड की घोषणा की थी। आखिर टैक्स सेविंग के लिहाज से डिवीडेंड मुफीद क्यों है, इस बात को समझने की कोशिश करते हैं।

बड़े निवेशकों के लिए फायदेमंद : बड़े निवेशकों जिनके पास ज्यादा तादाद में स्टॉक है, उनके लिए टैक्स बचाने का ये बेहतर विकल्प है। कई मामलों में अन्य माध्यमों से हुई आय पर अधिक कर अदा करना पड़ जाता है। ऐसे में डिवीडेंड के माध्यम से पैसा आने पर यह बोझ कम हो जाता है।

टैक्स की संरचना: ऐसा कहा जाए कि टैक्स के लिहाज से प्रत्येक स्थिति में डिवीडेंड बेहतर साबित होगा, ऐसा सही नहीं होगा। इस बात को एक उदाहरण से समझा जा सकता है, कैपिटल गैन से भी जहां आपको टैक्स में छूट मिलती है, तो डिवीडेंड से भी। पर, तुलनात्मक तौर पर देखें, तो कैपिटल गेन ज्यादा फायदेमंद है। हालांकि डिवीडेंड पर डिवीडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स लगता है लेकिन यह टैक्स कंपनी अदा करती है।

प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों में मुख्य शेयरधारकों को ज्यादा डिवीडेंड का फायदा मिलता है, क्योंकि इससे उनके ज्यादा टैक्स की बचत हो जाती है।

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