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सरकारी नौकरी पर फिदा युवा

कृष्णापुरी का आकाश आईआईएम ग्रेजुएट हैं। करीब तीन साल पहले संस्थान से निकलते ही एक विदेशी बैंक ने अपने यहां नौकरी पर रख लिया। उसने सोचा भी नहीं होगा कि उसे इतना पैकेज मिलेगा।

और साथ में मैट्रो सिटी में गाड़ी और बंगला अलग से। आए दिन फॉरेन टूर भी। लेकिन साल भर बाद ही उसकी खुशियों की इमारत ढ़ह गई। मंदी ने अपने स्टेटस पर इतराते आकाश जैसे लाखों युवाओं की नौकरी एक पल में ले ली। पहली बार जॉब की सिक्योरिटी का अहसास हुआ।

साथ ही युवाओं को यह भी समझ में आया कि सरकारी बैंकों या सरकारी संस्थानों में सुरक्षित भविष्य की गारंटी। इसका सबूत है दो साल में एक लाख बैंक नौकरियों के लिए 75 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों की शिरकत।

क्या है सरकारी नौकरी
एक तरह से प्राइवेट नौकरी का आनंद ही कुछ और हैं। ऊंचा वेतन और मनमर्जी नौकरी बदलने की भी संभावना। सरकारी और प्राइवेट नौकरी में फर्क जॉब सिक्योरिटी का ही हैं। यही कारण है कि हाल के दिनों में एक बार फिर से सरकारी नौकरी करने की चाहत ने जोर पकड़ा हैं।

अधिकतर की पहली पसंद
चालान बनाने के लिए बैंकों में लगी भीड़, कोचिंग संस्थानों में बैठने की जगह नहीं और पोस्ट ऑफिस में लंबी लाइन। स्पष्ट है कि सरकारी नौकरी के प्रति युवाओं का क्रेज बढ़ रहा हैं।

अधिकतर युवकों की अभी भी पहली पसंद सरकारी नौकरी हैं। यही नहीं मैरेज ब्यूरो और मैरिज कराने वाली वेबसाइट की भी रिपोर्ट बताती है कि अभी भी अधिकतर लोग सरकारी नौकरी करने वाले दूल्हा ही खोजते हैं।

डेढ़ लाख कर्मचारी होंगे रिटायर
ताजा आंकड़ों के अनुसार, बैंकिंग सेक्टर में तीन साल में करीब डेढ़ लाख कर्मचारी रिटायर होने वाले हैं। आरबीआई की नई गाइडलाइंस में दो हजार की आबादी पर बैंक में प्रावधान किया गया है। 2008 से अब तक स्टेट बैंक 31 हजार क्लर्को व सात हजार पीओ की भर्ती कर चुका हैं।

युवकों की भीड़ लगी है
मुसल्लहपुर और राजेंद्रनगर इलाके को बैंकिंग, रेलवे और एसएससी की परीक्षाओं की तैयारी का हब माना जाता हैं। अधिकतर कोचिंग संस्थान इन्हीं इलाकों में हैं। अभी आलम यह है कि तकरीबन सभी कोचिंग संस्थानों में भीड़ लगी हुई हैं। यहीं नहीं, हाल के दिनों में कई नए कोचिंग संस्थान भी खुल गए हैं। भीड़ के कारण अधिकतर लॉज हाउसफुल हैं।

इतनी हाई मेरिट पर भी डटे..
11000 पद और 36 लाख अभ्यर्थी! यानी एक पद के लिए 327 दावेदार। यह तो सिर्फ एक उदाहरण हैं। सभी बैंकों में निकलने वाले पदों के लिए कमोबेश यही हाल हैं। सफलता का अनुपात औसतन एक फीसदी से भी कम है। कठिन कोर्सेज में से एक माने जाने वाले एकेडेमिक सीए परीक्षा का सफलता अनुपात भी 8 फीसदी है। एसएससी का सफलता प्रतिशत भी इससे ज्यादा हैं।

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