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एनसीईआरटी की किताबों के लिए भटक रहे छात्र-अभिभावक

पिछले कई सालों की तरह इस साल भी एनसीईआरटी के किताबों की कमी छात्रों और अभिभावकों की मुसबीत बढ़ा दी हैं। खास तौर से कक्षा 6, 7 और 8 में मैथ और साइंस के किताबों की उपलब्धता का संकट हैं। कक्षा 6 में भूगोल की किताब भी नहीं मिल रही हैं। दुकानदारों की माने तो कक्षा 9 में लगभग सभी विषयों की किताबें नहीं हैं। कक्षा 10 में मैथ और सोशल साइंस के किताबों की समस्या है। बताया जा रहा है कि किताबों की जितनी डिमांड है, उतनी सप्लाई नहीं हैं। शिकायत यह है कि कुछ खास दुकानों पर ही किताबें हैं। इअर्दली बाजार स्थित अग्रवाल स्टेशनरी के आशीष अग्रवाल कहते हैं कि अभिभावकों को जवाब देते-देते थक गए हैं। कुछ किताबें हैं तो उनकी संख्या इतनी सीमित है कि किसको दे और किसको न दे।

जानकार बताते हैं एनसीईआरटी के किताबों की मांग साल दर साल बढ़ती जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि एनसीईआरटी किताबें सस्ती और क्वालिटी में बेहतर होती हैं। जिले में सीबीएसई से जुड़े करीब 55 विद्यालय हैं, जहां एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य रूप से चलती है।

इसके सीबीईएससी के पैटर्न पर चलने वाले कई स्कूल हैं, वे एनसीईआरटी की किताबें चलाते हैं। बनारस के अलावा पूर्वाचल तथा बिहार के विभिन्न जिलों में यहीं से एनसीईआरटी किताबें सप्लाई होती हैं। दो साल पहले तो संकट इतना गहरा गया था कि छात्रों को फोटोस्टेट कापी से पढ़ाई करनी पड़ी। जिन छात्रों को किताबें नहीं मिली। वे मायूस हैं।

दुकानदारों की माने तो एनसीईआरटी किताबें ही निजी प्रकाशकों के किताबों की किल्लत होती है। इसकी वजह है कि प्रकाशक भी सीमित मात्र में ही किताबें भेजते है, ताकि किताबें डम्प न हो जाए। यही वजह है कि जिन छात्रों के एडमिशन देर में होते है,उनके लिए मुसीबत और बढ़ जाती हैं।

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