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पीजी कोर्सों में 50 फीसदी ऑब्जेक्टिव प्रश्नों को मनाही

परीक्षा में सुधार कार्यक्रम के तहत पंजाब यूनिवर्सिटी ने प्रश्नपत्रों में ऑब्जेक्टिव टाइप प्रश्नों की संख्या बढ़ाकर 50 फीसदी तक ले जाने की जो योजना बनाई, जो सिरे नहीं चढ़ सकी। सीनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर कुछ शिक्षकों ने विरोध जताया और तर्क दिया कि पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर छात्रों का आंकलन 50 फीसदी ऑब्जेक्टिव प्रश्नों के आधार पर अनुचित होगा।

अंग्रेजी विभाग के प्रो. शैली वालिया ने इस विषय को उठाते हुए कहा कि यह तरीका हास्यास्पद हो जाएगा और परीक्षा का जो मूल मकसद है छात्रों का मूल्यांकन, वह सिरे नहीं पढ़ पाएगा। ऐसे में परीक्षा एक तुक्का बनकर रह जाएंगी।

हिन्दी विभाग के डॉ. गुरमीत सिंह ने भी प्रो. वालिया का साथ दिया और कहा कि कई विषयों में यह प्रक्रिया लागू करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कुछेक विषयों में तो यह सुझाव काम आ सकता हैं, लेकिन सभी विषयों विशेषकर लैगवेज पेपर्स में ज्यादा परेशानी आएंगी।

सीनेट सदस्यों के विरोध को देखते हुए कुलपति प्रो. आरसी सोबती ने इस दिशा में पुनर्विचार का भरोसा दिलाया और कहा कि जो सवाल उठाए जा रहे हैं, वह तार्किक हैं और इस दिशा में विचार कर ही आगे कदम बढ़ाया जाएगा।

पंजाब यूनिवर्सिटी ने पिछले दिनों परीक्षा में सुधार कार्यक्रम के तहत प्रो. बीएस बराड़ के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने कई सुझाव दिए, जिसमें क्वैशचन बैंक बनाने सहित कई योजनाएं शामिल थीं। इसमें प्रश्न पत्र के आधे प्रश्न ऑब्जेक्टिव रखे जाने की सिफारिश की गई थी।

इस प्रकरण पर कुलपति प्रो. आरसी सोबती का कहना है कि एक बार फिर इसे कमेटी के पास भेजा जाएगा और इसमें संभातिव सुधार कराकर ही लागू किया जाएगा। अंडर ग्रेजुएट के कुछेक विषयों में इस विधि को लागू रखा जाएगा।

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