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तैयारी के हर स्टेप पर फेल हो रही स्टेप मार्किंग

यूपी बोर्ड सीबीएसई की राह पर तो चल पड़ा है लेकिन बोर्ड और शासन के अफसर खुद को बदलने को तैयार नहीं हैं। इस वर्ष से कापियों के मूल्यांकन में स्टेप मार्किंग की व्यवस्था लागू कर दी गई है लेकिन शिक्षकों को इसकी कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई। मंगलवार को स्टेप मार्किंग की जानकारी देने के लिए गोष्ठी का आयोजन किया गया था। इसमें 23 जिले के डीआईओएस, तीन दजर्न जीआईसी और जीजीआईसी के प्रिंसपल के साथ ही बोर्ड के सभी अधिकारी शामिल हुए। लेकिन गोष्ठी में माध्यमिक शिक्षा मंत्री और बोर्ड के अफसरों ने स्टेप मार्किंग की हवा-हवाई जानकारियाँ दीं।

गोष्ठी में शिक्षा विभाग के अधिकारियों और डीएचई को स्टेप मार्किंग के बारे में बताने की बजाए बन्द लिफाफे में नए मूल्याकंन विधि की सीडी पकड़ा दी गई, जबकि डीआईओएस, जीआईसी के प्रिसिंपल और डीएचई यह उम्मीद कर रहे थे कि प्रोजक्टर के माध्यम से उन्हें स्टेप मार्किग के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। इससे वे आगे शिक्षकों को ठीक से समझा सकें। इन लोगों का कहना है कि ठीक से जानकारी न मिल पाने के कारण आगे शिक्षकों को जानकारी देने में दिक्कत होगी।

मूल्यांकन नहीं पारिश्रमिक की चिन्ता में लगे रहे
यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय इलाहाबाद में मंगलवार को मूल्यांकन संगोष्ठी हुई। इसमें तीन-चार जीआईसी के प्रिसिंपल ही स्टेप मार्किग के बारे में जानकारियाँ दे सके, जबकि दो दजर्न से अधिक जीआईसी के प्रिसिंपल और अन्य प्रधानाचार्यो ने कम पारिश्रमिक, विलम्ब से पारिश्रमिक मिलने, कोठारी को कम पारिश्रमिक मिलने, जेनरेटर और पेयजल की परेशानियों के बारे में जानकारी देते हुए पर्याप्त धन की माँग की। परीक्षा के दौरान ड्यूटी करने वाले कक्ष निरीक्षक सहित अन्य कर्मचारियों और परीक्षकों के पारिश्रमिक के समय से भुगतान की माँग की। चार प्रिसिंपलों के सीबीएसई के शिक्षकों के बराबर पारिश्रमिक भुगतान की माँग की।

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