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आईआईटी परीक्षा: चैन छिना, नींद उड़ी

आईआईटी-जेईई का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बेटा-बेटी अच्छा इंजीनियर बने। इसके लिए वे हरसंभव कोशिश करते हैं। अपने लाडले को हर मदद देने को तैयार भी रहते हैं। बच्चों के कॅरियर के आगे वे अपनी खुशी, सुख-चैन सब त्याग देते हैं। बस उनका एक ही सपना होता है-किसी तरह उनके बेटे या बेटी का आईआईटी में दाखिला हो जाए। 11 तारीख को आईआईटी जेईई की परीक्षा है। छात्र-छात्राएं तैयारी करने में एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। उनकी तैयारी में अभिभावक भी साथ दे रहे हैं। एक तरह से आईआईटी इंट्रेस देने वाले बच्चों के माता-पिता का भी रूटीन ही बदल गया है।

अभिभावक बने काउंसलर
11 अप्रैल को प्रदेश के लाखों स्टूडेंट्स आईआईटी की प्रवेश परीक्षा मे बैठेंगे। उनकी तैयारी अंतिम चरण में है। सभी सिर्फ रिवीजन कर रहे हैं। उनके अभिभावक भी एक काउंसलर की तरह गाइड कर रहे हैं। धैर्य के साथ पूरी लगन से पढ़ने की सलाह दे रहे हैं। बच्चे को किसी तरह की दिक्कत न हो, माता-पिता इसका पूरा ख्याल रख रहे हैं। किसी काम के लिए दबाव नहीं डाल रहे हैं। स्टडी मैटेरियल भी अभिभावक खुद लाकर दे रहे हैं, ताकि बच्चों का समय बर्बाद न हो। पढ़ाई के दौरान अभिभावक बच्चों का उत्साह भी बढ़ा रहे हैं।

सूरज के अभिभावक पारसनाथ सिंह कहते हैं कि सुबह से शाम तक सूरज पर ध्यान देता हूं। परीक्षा में सफल होने के लिए बाहर से महंगा स्टडी मैटेरियल लाकर दिया है। बच्चों पर घर के काम का दबाव नहीं बनाता हूं। यह दूसरा मौका है। उम्मीद है कि इसबार परीक्षा में अच्छा रैंक आएगा। पढ़ाई में पैसा को कभी बाधक नहीं बनने दिया। सभी विषय की अलग कोचिंग कराई है।

सुमन की मां स्मिता देवी और पापा शिवनाथ कहते हैं कि सुमन अभी दस से बारह घंटा तक पढ़ाई कर रहा है। उसकी हर सुविधा का हमलोग ख्याल रखते हैं। जब जरूरत पड़ती है, हमलोग खुद जाकर पुस्तक खरीद कर लाते हैं। एक ही सपना है कि बेटा एक अच्छा इंजीनियर बन जाए। इसके लिए हम लोग हरसंभव मदद को तैयार हैं।

आकाश के अभिभावक शोभा देवी व अनिल कुमार कहते हैं कि बच्चों की पढ़ाई के लिए हर तरह की कुर्बानी देनी पड़ती है। हमारे बच्चे ही असली पूंजी हैं। परीक्षा में किसी तरह की कोई कमी नहीं रह जाए, इसका पूरा ख्याल रखते हैं। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। फिर भी कोई कमी नहीं होने देता हूं। बस यही कामना है आईआईटी में इसे अच्छा कॉलेज मिल जाए।

शिपू की मां इंदू देवी और पिता मोहन कुमार कहते हैं कि कई एग्जाम लगातार देने हैं इसलिए उस पर ज्यादा प्रेशर नहीं देते हैं। बच्चों की वजह से अपने अरमानों को भूल गये हैं। चाहकर भी कहीं घूमने नहीं गये हैं। बच्चे ही हमारे सपने हैं। मिडिल क्लास के होने के बाद भी हमलोग बच्चों की हर इच्छाओं की पूर्ति करते हैं। जरूरत पड़ने पर साथ में थोड़ी देर बैठकर उसका उत्साह भी बढ़ाते हैं।

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