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निरोग के वास्ते योग के रास्ते

निरोग के वास्ते योग के रास्ते

भागदौड़ भरी जिंदगी और उससे उपजे तनाव और महंगे इलाज ने आम आदमी को योग और फिटनेस की ओर आकर्षित कर दिया है। इसी के चलते योग प्रिशिक्षकों और ट्रेनरों की मांग तेजी से बढ़ी है। अगर आप इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं तो यह एक बेहतर अवसर है।

ब्रह्म प्राप्ति का मार्ग बताने वाला योग अब ब्रांड बन गया है। एक ऐसा ब्रांड, जिसका सिक्का बाजार में खूब चलता है और चलाने वाले को अच्छी-खासी कमाई भी होती है। उसके लिए यह रोजगार का अच्छा-खासा साधन बन गया है। युवाओं में यह करियर के नए अध्याय के रूप में जुड़ गया है। योग प्रशिक्षक या इंस्ट्रुक्टर के रूप में आज का युवा चाहे कॉरपोरेट दफ्तर हो या छोटे शहर का गली-मुहल्ला, हर जगह छाया हुआ है। किसी को शांति का रास्ता बताता हुआ तो किसी को शारीरिक और मानसिक रोगों से छुटकारा पाने का उपाय। वह गांव से लेकर महानगर के दमघोंटू माहौल में हर किसी को सुख, शांति और समृद्धि का सस्ता और सहज उपाय बता रहा है। यह इलाज का एक ऐसा साधन है, जिसे आसानी से समझा और देखा जा सकता है।

योग को चित्त की समाधि कहा जाता है। इस समाधि को प्राप्त करने के लिए साधना की जरूरत पड़ती है। साधना की तरह-तरह की विधियों को जानने वाले शख्स को योग इंस्ट्रुक्टर, योग प्रशिक्षक या योग शिक्षक के नाम से जाना जाता है। पुराने जमाने में योग गुरु को आध्यात्मिक गुरु का दर्जा मिला हुआ था, लेकिन अब करियर के क्षेत्र में आध्यात्मिक गुरु की बजाय योग का ज्ञान रखने वाले और उसका प्रशिक्षण देने वाले व्यक्ति को योग इंस्ट्रुक्टर या योग शिक्षक कहा जाता है। वह अब पहले के गुरुओं की तरह ईश्वरत्व की प्राप्ति नहीं कराता, बल्कि योग और उससे जुड़ी विभिन्न क्रिया-विधि और आसन का अभ्यास कराता है।  

योग अष्टांग की प्रक्रिया है। पतंजलि के योगसूत्र में इस अष्टांग योग की ही चर्चा की गई है। यह अष्टांग आठ हैं-यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। इस क्रम को ही योग की साधना में शामिल किया जाता है। इस साधना से ईश्वरत्व को अपने अंदर अनुभूति कराने के लिए योगाभ्यास कराया जाता है। ऐसा होने पर मन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है और साथ में स्वास्थ्य लाभ की भी। यम और नियम, दोनों मानवीय मूल्य हैं। यम पांच है- अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्म और परिग्रह। नियम भी पांच हैं। शौच, संतोष, तपस, स्वाध्याय और प्राणिधान। आसन की तरह-तरह की विधियां हैं। प्राणायाम श्वास-प्रश्वास की गति को विच्छेद करना या अनुशासित करना है। प्रत्याहार अपने आप को सांसारिकता यानी इंद्रिय भोगों से मुक्त करना है। धारणा मेडिटेशन की तकनीक है। धारणा की उपलब्धि है मेडिटेशन। धारण करते हैं तो ध्यान की उपलब्धि होती है और गहराई में जाने पर समाधि की होती है। समाधि में ध्यान की असीमितता होती है। ये आठों एक क्रम में हैं। योग शिक्षक या प्रशिक्षक बनने वाले को कोर्स में इन सबकी जानकारी दी जाती है। इसका ज्ञान कराया जाता है।

बाजारीकरण और उदारीकरण के दौर में पिछले बीस सालों में भारत में करियर के क्षेत्र में योग इंस्ट्रुक्टर की मांग खूब बढ़ी है। निजी स्कूल हों या कॉलेज या विश्वविद्यालय, सरकारी हो या निजी दफ्तर, हॉलीवुड हो या बॉलीवुड, योग इंस्ट्रुक्टर इनमें अपना महत्त्वपूर्ण रोल अदा करने लगा है। अस्पताल, कर्मचारी प्रशिक्षण केन्द्र और व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्र जैसी सभी जगहों पर इसकी जरूरत पड़ रही है। अस्पताल में अर्थराइटिस और अस्थमा वाले मरीज को भी योग प्रशिक्षक की जरूरत पड़ती है। उन्हें योग साधना करा कर स्वास्थ्य लाभ कराया जाता है। स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों को अनुशासित जीवन जीने और अपने लक्ष्य पर केन्द्रित करने, परीक्षा के तनावों से मुक्ति दिलाने के लिए योग प्रशिक्षक रखे जा रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के गांधी भवन में चलने वाली क्लास में ऐसे छात्रों की तादाद काफी है, जो किसी न किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। बॉलीवुड और हॉलीवुड की बात करें तो वहां मानसिक और शारीरिक सौन्दर्य में निखार लाने के लिए अभिनेता और अभिनेत्रियां योग क्लास की शरण में जाती हैं।  

आज देश भर में योग के लिए कई कोर्स चलाए जा रहे हैं। कहीं सर्टिफिकेट व डिप्लोमा कोर्स तो कहीं डिग्री कोर्स। कई विश्वविद्यालय योग में पीएचडी भी करा रहे हैं। एक कुशल और प्रोफेशनल योग शिक्षक बनने के लिए यह कोर्स जरूरी है। पहले यह साधना से ही सीखा जाता था, लेकिन बदलते जमाने में इसे पाठय़क्रम में ढाल दिया गया है, जहां अभ्यास और उससे जुड़ी थ्योरी की ट्रेनिंग दी जाती है। इस ट्रेनिंग को करने के बाद ही योग शिक्षक व इंस्ट्रुक्टर के रूप में छात्र बाजार में करियर बनाते हैं। योग प्रशिक्षक के लिए किसी संस्थान में नियमित कर्मचारी के रूप में काम करने के अलावा एक बड़ा रास्ता कोचिंग सेंटर खोलने का भी है। स्कूलों में योग शिक्षक को टीजीटी का वेतनमान मिलता है। कॉलेजों में इन्हें योगाचार्य कहा जाता है। उनके लिए लेक्चरर, रीडर व प्रोफेसर बनने का विकल्प खुला होता है।

योग की विधियों का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए

योगाचार्य सीबी सिंह,
गांधी भवन, दिल्ली विश्वविद्यालय

भारत में 1990 के बाद योग शिक्षक का करियर काफी लोकप्रिय हुआ है। इनकी मांग का ही आलम है कि आज बहुत सारे लोग खुद को योगाचार्य या योग इंस्ट्रक्टर कह कर बाजार में अपनी दुकान चला रहे हैं। एक सही योग प्रशिक्षक या इंस्ट्रक्टर बनने के लिए आवश्यक गुण और इसकी विधियों का ज्ञान होना जरूरी है।

योग के प्रति निष्ठा हो। कोर्स कर लेना ही काफी नहीं है, छात्र को योग साधना की जानकारी भी होनी चाहिए। उसमें यह क्षमता होनी चाहिए कि वह किस व्यक्ति को योग साधना में उतारे। इसके लिए उसे निरंतर अभ्यास करना चाहिए। नियमित साधना के बिना एक अच्छा योग प्रशिक्षक या इंस्ट्रक्टर बनने का वह हकदार नहीं है। इसके बिना वह करियर में ज्यादा दिन तक टिका नहीं रह सकता।

योग भी एक विज्ञान है, लेकिन दूसरे विज्ञानों से इसमें फर्क हैं। इसके कोर्स में पहले प्रेक्टिकल, फिर थ्योरी आती है, इसलिए योग शिक्षक बनने की राह पर खड़े छात्रों को इन बातों पर ध्यान देना जरूरी है। योग साधना कराते वक्त पहले अभ्यास पर विशेष ध्यान दें।

कोर्स में 12वीं के बाद सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, एडवांस डिप्लोमा से लेकर एमए व पीएचडी तक सभी तरह के विकल्प उपलब्ध हैं। किसी भी छात्र को जरूरत के हिसाब से ही कोर्स में दाखिला लेना जरूरी है। अगर वह इसका गहन ज्ञान चाहता है तो वह पीएचडी कर सकता है।

लगन दिलाती है सफलता
पृथ्वी सिंह, योग ट्रेनर

राजधानी में योग ट्रेनर के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए लगातार चार-पांच साल संघर्ष करना पड़ा। घर में आर्य समाजी माहौल था, जहां बचपन से ही आर्यवीर दल को योग, प्राणायाम आदि से तरह-तरह के चमत्कार करते देखता था। इससे प्रेरित होकर खुद को योगासन में ढालने लगा। कुरुक्षेत्र युनिवर्सिटी से आर्ट्स में स्नातक किया। उसके बाद नौकरी की समस्या आ गई। ऐसे मौके पर योग में रुचि और घर का माहौल काम आया। योग के क्षेत्र में प्रैक्टिस तेज कर दी। गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार से योग में छह माह का डिप्लोमा किया। इसके बाद जैन विश्व भारती लाडनू से योग में एमए भी किया। कोर्स के दौरान ही धीरे-धीरे योग शिक्षक के रूप में खुद को स्थापित करने लगा। शुरू में लोग इस रूप में आसानी से स्वीकार नहीं कर पाते थे, लेकिन इसके बावजूद इस क्षेत्र में लगन के साथ जुटा रहा। धीरे-धीरे काम मिलने लगा, संपर्क बढ़ा और एक दिन योग ट्रेनर बन कर चीन भी जाने का मौका मिला। परिवार के कई दूसरे सदस्य भी इस क्षेत्र में आगे आए। वे सिंगापुर, हांगकांग और चीन में योग की ट्रेनिंग दे रहे हैं। मुझे भी चीन जाने का मौका मिला, लेकिन मेरा मन वहां नहीं लगा। वापस भारत आ गया और दिल्ली में इस काम को करने लगा। इस कड़ी में पेट्रोलियम मंत्री जतिन प्रसाद, पोलो प्लेयर अधिराज सिंह, गोल्फ खिलाडी विराट बधवार, सांसद दुष्यंत सिंह जैसी कई हस्तियों को योग का प्रशिक्षण देने का मौका मिला है।

ट्रेनिंग देते वक्त यह ख्याल रखना चाहिए कि खुद बीमार या अस्वस्थ न लगें। चेहरे पर ताजगी और हावभाव ऐसा जरूर रखें, जिससे सामने वाला आप से प्रभावित हो।

योग थेरेपिस्ट की बहुत डिमांड है
उषा एल्बुकर्क
निदेशक, करियर स्मार्ट

मैं बीए फाइनल ईयर का स्टूडेंट हूं। मैं अपना करियर योग में बनाना चाहता हूं। कृपया मुझे योग के इंस्टीट्यूट और कोर्स के बारे में बताएं। - आहू परिहार, पूर्वी दिल्ली
योग में सफलता के लिए आपमें बेहतर कम्युनिकेशन स्किल का होना नितांत आवश्यक है, क्योंकि इसके क्लाइंट विभिन्न क्षेत्रों और स्तरों से हो सकते हैं। इनका आयु वर्ग और शारीरिक संरचना भी अलग-अलग हो सकती है। आपके अंदर लोगों की जरूरत को सुनने-समझने की क्षमता होनी चाहिए और उनको ये विश्वास दिलवाने की भी कि उनकी समस्या ठीक हो जाएगी। आपको अपने ट्रेनिंग प्रोग्राम का ट्रेलर भी देना पड़ेगा। इस कार्य का दूसरा अहम पहलू मोटिवेशन है। आपको अपना मोटिवेशन लेवल ऊंचा रखना पड़ेगा, जिससे आप कड़ी मेहनत कर पाएंगे और अपने क्लाइंट को भी संतुष्ट कर पाएंगे।
योग के लिए निम्नलिखित कोर्स प्रमुख हैं :
- योग थेरेपी में डिप्लोमा कोर्स
- योग एजुकेशन/योग स्टडीज में डिप्लोमा कोर्स
- योग थेरेपी में टीचर ट्रेनिंग (योग थेरेपी में सर्टिफिकेट कोर्स )
- योग थेरेपी में बीए/बीएससी (योग्यता : ग्रेजुएशन, दर्शनशास्त्र वालों को प्रमुखता)
- योग थेरेपी में एमए/एमएससी (योग्यता : बीए/बीएससी में योग थेरेपी)
योग कोर्सेज करवाने वाले मुख्य संस्थान
- गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार (उत्तरांचल)
-  यूनिवर्सिटी ऑफ पुणे, पुणे (महाराष्ट्र)
- डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, आगरा (यूपी)
- गुजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद (गुजरात)
- हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी, शिमला (हिमाचल प्रदेश)

मैं ग्रेजुएट हूं और बीएड भी किया है। मैं अपना करियर योग में बनाना चाहता हूं। कृपया मुङो इसके बारे में कुछ विस्तार से बताएं? इसमें भविष्य क्या है?
 राजकुमार चौधरी, शालीमार  बाग

योग का मतलब है विभिन्न आसनों और एक्सरसाइजों का संगठन। योग का उद्देश्य होता है बीमार व्यक्ति को अच्छा स्वास्थ्य हासिल करवाना और भावनात्मक और शारीरिक स्तर पर मजबूती प्रदान करना। भारत में योग सदियों से बहुत ही लोकप्रिय रहा है और इस समय बतौर करियर बहुत ही ज्यादा प्रचलन में है। छात्रों के लिए योग का क्षेत्र बहुत ही व्यापक है। इसके जरिए आप किसी हॉस्पिटल में योग या फिटनेस इंस्ट्रुक्टर या कंसल्टेंट बन सकते हैं। योग कई रोगों में बहुत ही ज्यादा फायदेमंद साबित होते हैं, जो कि संबंधित व्यक्ति की जिंदगी में आमूल-चूल परिवर्तन लाने में सक्षम हैं। योग थेरेपिस्ट की भी बहुत डिमांड है, जो कि किसी हॉस्पिटल में इंस्ट्रुक्टर के रूप में कार्य कर सकते हैं। आईटी कंपनियां और बड़े-बड़े होटल आजकल योग इंस्ट्रुक्टर की जॉब ऑफर कर रहे हैं। टूरिज्म सेक्टर में भी योग इंस्ट्रुक्टर की खूब डिमांड है।

मैं अपना करियर योग में बनाना चाहता हूं। इसके लिए मैं कहां से पढ़ाई कर सकता हूं?
 मो. फैजल, खैराबाद

हैल्थ एंड फैमिली वेलफेयर मंत्रलय के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ आयुर्वेद, योग एंड नेचुरोपैथी, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी की सेंट्रल कौंसिल फॉर रिसर्च इन योग एंड नेचुरोपैथी ने अपनी वेबसाइट पर 10 कॉलेज के नाम दिए हैं, जिसमें से 3 कर्नाटक में, 4 तमिलनाडु में, आंध्र प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ में एक-एक कॉलेज है।

मैंने 12वीं के बाद गांधी स्मारक निधि हॉस्पिटल, पटपड़गंज से नेचुरोपैथी में एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स पूरा किया है। इसमें करियर की क्या संभावनाएं हैं? मैं अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए और क्या कर सकता हूं?
अमित शर्मा, किशनगंज, दिल्ली

अब आपको अनुभव लेने के लिए प्रयास करना चाहिए। नेचुरोपैथी बहुत तेजी से सारे देशों मे पॉपुलर हो रही है। बतौर प्रोफेशनल करियर इसमें बहुत ही ज्यादा संभावनाएं हैं। भारत में नेचुरोपैथ्स को गवर्नमेंट के साथ-साथ प्राइवेट हॉस्पिटल में भी नियुक्त किया जाता है। इसके साथ ही आप अपना खुद का सेंटर चला सकते हैं।
इन सारी बातों से स्पष्ट है कि योग के क्षेत्र में महारत हासिल करने के साथ ही ढेरों संभावनाएं व्याप्त हैं। आप तुरंत किसी हॉस्पिटल, स्कूल, कंपनी के साथ काम शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा अपना खुद का सेंटर खोल सकते हैं।


प्रमुख संस्थान
कैवल्यधाम, लोनावाला, पुणे

सर्टिफिकेट कोर्स इन योगा, क्रेश कोर्स, डिप्लोमा इन योगा एजुकेशन, डिप्लोमा इन योगाथेरेपी, योग शिक्षकों के लिए एडवांस टीचर्स ट्रेनिंग जैसे कोर्स इस संस्थान से करवाए जाते हैं।

दाखिले की प्रकिया : साल में दो बार सर्टिफिकेट कोर्स करवाए जाते हैं। इन कोर्सो की अवधि छह सप्ताह है। इसमें दाखिले के लिए 12वीं पास होना जरूरी है। क्रेश कोर्स डेढ़ माह का है। एक वर्षीय डिप्लोमा इन योगा एजुकेशन कोर्स में दाखिले के लिए स्नातक स्तर पर 45 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण होना अनिवार्य। आवेदन 31 मई तक। इसके योग थेरेपी कोर्स में डॉक्टर्स, बीएससी बायोलॉजिकल साइंस के स्नातक या योग एजुकेशन में डिप्लोमा प्राप्त छात्र प्रवेश ले सकते हैं। दाखिला पाने वालों के लिए रहने और खाने की भी
व्यवस्था है।

अन्य प्रमुख संस्थान
-  बिहार स्कूल ऑफ योगा, गंगा दर्शन, मुंगेर।
-  सागर यूनिवर्सिटी, मध्य प्रदेश
-  डिवाइन लाइफ सोसायटी, ऋषिकेश।
-  जैन विश्व भारती, लाडनू, राजस्थान।
-  मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योग, दिल्ली।
-  गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार।
-  देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार।
-  यूनिवर्सिटी ऑफ पतंजलि, हरिद्वार।

कोचिंग संस्थान
स्थानीय स्तर पर ऐसे अनेक योग प्रशिक्षिक उपलब्ध रहते हैं, जो योग का प्रशिक्षण देते हैं। ये योग प्रशिक्षक आपको योग की आधारभूत जानकारी से अवगत करा कर अन्य कोर्सेज के लिए तैयार कर सकते हैं। हां, इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट प्रवेश परीक्षा की स्टडी करवाने जैसे योग कोचिंग संस्थान नहीं हैं।

स्कॉलरशिप
इस कोर्स में दाखिला पाने वाले छात्रों को सर्टिफिकेट और डिप्लोमा स्तर पर किसी तरह की स्कॉलरशिप नहीं मिलती। हां, कुछ संस्थान डिग्री और पीएचडी करने पर स्कॉलरशिप जरूर मुहैया कराते हैं। सीसीआरवाईएन यानी काउंसिल फॉर रिसर्च इन योग एंड नेचुरोपैथी संस्थानों को योग में रिसर्च के लिए फंड मुहैया कराती है।

एजुकेशन लोन
योग से जुड़े कोर्स करने के लिए आमतौर पर बैंकों द्वारा लोन की सुविधा तो नहीं है, लेकिन योग से जुड़े कोचिंग सेंटर खोलने पर बैंक लोन की सुविधा मुहैया कराते हैं। वे सेंटर में आवश्यक संसाधन जुटाने के लिए लोन देते हैं। इसके लिए बैंकों की शर्तों के मुताबिक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।

नौकरी के अवसर
स्कूलों में टीजीटी शिक्षक के रूप में। कॉलेजों में बतौर योगाचार्य काम किया जा सकता है। योग इंस्ट्रक्टर या प्रशिक्षक के तौर पर विभिन्न निजी कंपनियों, होटलों, अस्पतालों में भी अपनी सेवा दे सकते हैं। कोचिंग संस्थान खोल कर स्वरोजगार के रूप में योग क्लास लगा सकते हैं। कैवल्यधाम, लोनावाला के योगाचार्य भोगलजी के अनुसार इसे स्वरोजगार के रूप में अपना कर बेहतर ढंग से आजीविका कमाई जा सकती है। जगह-जगह योग शिविर चला कर अच्छी-खासी कमाई की जा सकती है।

वेतन
आमतौर पर वेतन की बात करें तो स्कूलों में टीजीटी स्केल यानी 25 से 30 हजार का वेतन शुरुआती तौर पर है। इसी तरह कॉलेजों में योगाचार्य के वेतनमान की शुरुआत 40 हजार रुपये से है। इसके अलावा स्वरोजगार के तौर पर आय प्रतिमाह 15 हजार से लेकर लाखों रुपये तक हो सकती है।

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