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सिख दंगा: कमलनाथ के नाम अमेरिकी अदालत का समन

सिख दंगा: कमलनाथ के नाम अमेरिकी अदालत का समन

अमेरिका की एक संघीय अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री कमलनाथ के नाम समन जारी किया है। एक सिख संगठन ने दंगों में कमलनाथ की कथित भूमिका के बारे में मामला दर्ज किया था।
   
एलियन टॉटर्स क्लेम्स अधिनियम के तहत दर्ज मामले में याचिकाकर्ता ने कमलनाथ से मुआवज़े और उन्हें दंड देने की मांग की है। उन पर कई आरोप लगाए गए हैं, जिनमें मानवता के ख़िलाफ अपराध और ग़लत उददेश्य से हत्या मुख्य हैं।
   
संयोग से कमलनाथ इन दिनों अमेरिका में ही हैं। अदालत के समन पर उन्होंने कहा कि वह इससे आश्चर्यचकित हैं क्योंकि मामला 25 साल बाद दर्ज हुआ है। कमलनाथ ने कहा, "मेरे पास इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। मुझे इसकी प्रामाणिकता और वैधता के बारे में भी पता नहीं है। मुझे इसके बारे में पहली बार पता चला है।"
  
कमलनाथ को नोटिस भेजा गया है और उन्हें इस पर 21 दिन में प्रतिक्रिया देनी होगी। मंत्री ने कहा कि उन्हें इस मामले के बारे में अध्ययन करना होगा। उन्होंने कहा, "मुझे एक कागज़ी दस्तावेज़ दिया गया है और मुझे देखना होगा कि यह किस बारे में है।"

कमलनाथ ने ज़ोर देते हुए कहा कि उनके ख़िलाफ न तो किसी अदालत में कोई मामला दर्ज हुआ है और न ही उनसे कभी पूछताछ हुई है। उन्होंने प्रश्न किया कि यह आरोप दंगों के दो दशक बाद क्यों सामने आया है और वह भी विदेशी ज़मीन पर। उन्होंने कहा,"भारत में किसी ने मेरे उपर कभी आरोप नहीं लगाए, लेकिन अगर अमेरिका में मुझ पर ऐसे मामले में 25 साल बाद आरोप लगते हैं, जो भारत से जुड़े हैं तो इससे इसकी प्रामाणिकता के बारे में पता चलता है।"
   
कमलनाथ ने कहा ,"पिछले 25 साल से मैं इसमें शामिल नहीं था। 2010 में मैं अचानक इसमें शामिल हो गया। कोई भी ऐसा नहीं है जो खड़ा हो और कहे कि वह पीड़ित है और मैं किसी तरह से इससे जुड़ा हूं। इसलिए मुझे बहुत आश्चर्य हो रहा है।"
   
न्यूयार्क आधारित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस की ओर से दो सिखों, जसबीर सिंह और महिंदर सिंह ने मामला दर्ज कराया है। उनके एटॉर्नी गुरपतवंत पन्नून ने दावा किया है कि जसबीर ने दंगों में अपने परिवार के 24 सदस्यों को खोया, जबकि उस समय दो वर्ष के रहे महिंदर ने अपने पिता को दंगों में खोया।
   
सिख समूह ने कहा कि वह अब कार्रवाई कर रहे हैं क्योंकि उन्हें आशा थी कि मामला भारत में उठेगा।
पन्नून ने कहा हम इतने साल तक इंतज़ार करते रहे क्योंकि आयोगों का गठन किया गया था। हमें आशा थी, लेकिन अपनी स्थिति की वजह से कमलनाथ 25 साल तक न्याय से सफलतापूर्वक बचते रहे।

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