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लेकिन सही तो सही है

अपनी बेटी को एक स्कूल में दाखिल करना चाहते थे वह। स्कूल पहुंचे तो रिसेप्शन पर ही बता दिया गया कि सारी सीट भर गई हैं। उन्होंने कुछ जोर दिया, तो रिसेप्शनिस्ट ने डोनेशन की बात की। धीरे से उसने कहा कि स्कूल में एक स्वीमिंग पूल बन रहा है, उसके लिए कुछ कर दीजिए। वह उखड़ कर चले आए। अब जिस स्कूल में शुरुआत ही इस अंदाज में हो रही हो, उसमें अपने बच्चे को सही रास्ता कैसे दिखाएंगे वह।

यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में साइकोलॉजी के प्रोफेसर क्रिस्टोफर पीटरसन मानते हैं कि सही तो सही है, लेकिन सही रास्ता आसान नहीं होता। इसीलिए ज्यादातर लोग आसान रास्ता चुनने के लिए गलत काम करने लगते हैं। ‘गलत तो गलत है। उसके लिए किसी बहाने की जरूरत नहीं है।’ पीटरसन कहते हैं। सही भी है। हम अगर गलत हैं, तो फिर किसी बहाने की क्या जरूरत? हमें मान लेना चाहिए कि गलत हैं।

अक्सर हम गलत काम से ही आगे बढ़ने वालों में फंसे रहते हैं। रास्ता गलत है, लेकिन वह एक पगडंडी तो है ही न। सही का रास्ता तो बड़ा लंबा है। वह तो हाईवे जैसा है। वहां कोई शॉर्टकट नहीं है। उसके लिए कोई पगडंडी नहीं है। और जब हमें कोई पगडंडी दिखलाई पड़ जाती है, तो फिर लंबा रास्ता तय करने का मन नहीं करता। शायद इसीलिए सही के लिए मन कड़ा करना पड़ता है।

आप जरा-सा विचलित हुए तो पगडंडी की ओर चल देते हैं। और फिर बहाने बनाने लगते हैं। गलत को हमेशा बहाना चाहिए। सही को किसी बहाने की जरूरत क्या है? हम अपने हिसाब से सही करें। बाकी सारी चिंताएं छोड़ दें। सही के लिए बहुत सारा हिसाब-किताब करने की भी जरूरत नहीं है। कोई नहीं कहता कि सही होना या करना आसान काम है। लेकिन सही तो सही है न।

 

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  • Web Title:लेकिन सही तो सही है