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कन्या भ्रूण को जीने दो

एक मां, एक बहन, एक बेटी, एक नारी रिश्ता, कभी न कभी तो कन्या भ्रूण ही था। क्या एक कन्या भ्रूण के बिना समाज के इनमें से एक भी रिश्ता संभव हो सकता है। हमारा उस कन्या भ्रूण से कोई भी रिश्ता क्यूं न हो हम विचार करें क्या उसकी हत्या करके या उसे नष्ट करके हम परिवार और समाज का एक रिश्ता नष्ट नहीं कर रहे। जिनके बिना हमारा जन्म ही संभव नहीं है। हम उसे ही नष्ट-भ्रष्ट करने पर तुले हैं। एक बात और कन्या भ्रूण हत्या करने में सबसे बड़ी भूमिका ननद, भाभी, चाची, ताई, मामी, सास, मां, बहन (नारी) की भी है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भ्रूण हत्या करके हम मायावती, सोनिया गांधी, मदर टेरेसा, मार्गरेट थेचर, मीरा कुमार जैसी शख्सियतों को पैदा करने से रोक रहे हैं।
शिव प्रकाश शर्मा, हापुड़

हनुमान जी बंदर नहीं थे
हनुमान भक्तों से विनम्र विनती है कि हनुमान जी को बंदर मत बनाओ। वो वीर बजरंग बली थे। उनके पिता राजा पवन थे और माता अंजना थीं। जो राजा महेन्द्र राय की पुत्री थीं। वनों में पैदा हुए और वनों में ही रहते थे, अत: उनको वानर भी कहते हैं। श्रीरामचंद्र जी की सेना के सेनापति थे। संस्कृत के पंडित और खगोल विधा के ज्ञाता ज्योतिषाचार्य थे। उन्हें पूंछ लगाकर बंदर बनाना उन का अपमान करना है।
देवराज आर्यमित्र, नई दिल्ली

मानवता की राह
दोपहर का समय था मैं किसी पार्क में बैठा था मैंने देखा एक सज्जन मिट्टी के बरतन को अच्छी तरह धो कर उसमें पक्षियों के लिए पानी भर कर रख रहा था, पार्क में पक्षियों के लिए बाजरा भी बिखरा पड़ा था। कबूतर, गिलहरी और एक कौआ दाना चुगने में व पानी पीने में व्यस्त थे। ऐसे लोग कितने उच्च विचारों के होते हैं कि उनको पशु-पक्षियों तक का ख्याल रहता है। यही मनुष्य के ऊंचे विचार मनुष्य को मनुष्यता या मानवता की तरफ ले जाते हैं। अगर हम सच्चे दिल से पाठ पूजा, इबादत, दान, पुण्य अच्छे काम करेंगे तो मन को शांति भी मिलती है। इंसानों की सेवा करना, पशु पक्षियों की सेवा करना, दीन दुखियों की सेवा करना, नेत्रहीनों की सेवा करना, भूखे को भोजना देना, प्याऊ लगवाना यह सब अच्छे कार्य मनुष्य को करते रहने चाहिएं व जो व्यक्ति जिस किसी धर्म को भी मानते हैं उसमें तत्पर रहना चाहिए।
श्याम सुन्दर, 1814, संजय बस्ती, दिल्ली

पीयू में भेदभाव की राजनीति 
पंजाब यूनिवर्सिटी में विभागीय राजनीति के चलते छात्रों के साथ भी भेदभाव हो रहा है। यहां के ईवनिंग डिपार्टमेंट ने नियम-कानून ताक पर रखकर हाजिरी पूरी न करने वाले छात्रों के रोल नंबर जारी कर दिए। 75 फीसदी अटेंडेंस नहीं होने की दशा में इस विभाग के 250 से भी अधिक छात्रों के रोल नंबर रोक दिए गए थे। परीक्षा के दो दिन पहले छात्रों ने प्रदर्शन किया तो पीयू प्रशासन ने बैठक कर पहले 53 छात्रों को रोल नंबर जारी कर दिए। इसके बाद जब छात्रों ने फिर संघर्ष का रास्ता अपनाया तो कमेटी ने रहम के नाम पर 193 छात्रों को 250 रुपए के शुल्क पर परीक्षा देने की इजाजत दे दी।
प्रकाश जैन, सेक्टर-25, चंडीगढ़

शिकायत बॉक्स की पोल
सिविल लाइन श्रीराम रोड पुलिस अधिकारी मैस के पीछे वाली दीवार पर कई वर्षो से दिल्ली पुलिस की शिकायत एवं सुझाव बॉक्स पुराने तारों से बंधा हुआ है, उसमें ताला नहीं है। दिल्ली के माननीय सी.पी. साहब से अनुरोध है कि शिकायत एवं सुझाव पेटी को ठीक ढंग से लगाएं ताकि जनता को अपनी बात कहने में सुविधा हो और उनकी बात पुलिस के अलावा किसी दूसरे के हाथ न लगे।
मीना सतीश सोलंकी, यमुना विहार, दिल्ली

ढोंगी बाबाओं का नेटवर्क
‘कब मिलेगी मुक्ति इन ढोंगी बाबाओं से’ डॉ. गौरीशंकर राजहंस ने बात तो कही है परंतु सच्चाई कोसों दूर है अन्यथा धर्मनिरपेक्षता जैसी भौतिकता में कानूनी ढोंग क्यों नहीं रोका जा सकता था? इस धंधे में कई लोग शामिल हैं- चेले-चमचों, गुरु, सलाहकार, राजनीति ओढ़े लोग हैं। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारी हैं, गलत कानून है और रही-सही पूर्ति करता है प्रेस।
चौ. श्रीचन्द भाटी, गाजियाबाद

गजब कहानी
अजब प्रेम की गजब कहानी
सानिया प्रेम दीवानी।
भारत की टेनिस राजकुमारी
बनेगी पाकिस्तानी।
क्रिकेटर की रानी।
वीरेन कल्याणी
विश्वास नगर, शाहदरा, दिल्ली

ब्रह्मांड की उत्पत्ति का रहस्य
यह ब्रह्मांड कैसे अस्तित्व में आया? सदियों से इस जटिल प्रश्न का हल जानने के लिए लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर नामक मशीन भी ईजाद कर ली है जिसके जरिये हाल ही में प्रोटोनों की टक्कर कराई गई। हालांकि, कुछ वैज्ञानिकों ने इस प्रयोग के चलते पूरे विश्व के नष्ट हो जाने के डर से सवाल उठाए थे, जिन्हें बाद में बेबुनियाद करार दे दिया गया। देखना यह है कि वैज्ञानिकों के ताजा प्रयोग से जो आंकड़े हासिल किए गए हैं, उनसे ब्रह्मांड की उत्पत्ति का रहस्य खुलता है या नहीं।
भदेस राम, मेरठ

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