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इस पैशन से पचास बीमारियां

नौजवानों का पैशन है बाइक ड्राइविंग। हैवी ट्रैफिक के बीच घंटों तेज रफ्तार में ड्राइविंग जिस्म पर भारी पड़ती है और दिमाग पर भी। शहरी बाइकर्स के लिए तो यह समस्या और अधिक है क्योंकि शहर की भीड़-भाड़ ड्राइविंग को न सिर्फ जोखिम भरा बना रही है, बल्कि सेहत पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। जिस्म और दिमाग दोनों इसके शिकार हो रहे हैं।

एक अंदाजा है कि महानगरों में नौजवान रोजाना औसतन 60 से 100 किलोमीटर तक बाइक भगाते हैं। यह आंकड़ा तो सिर्फ लड़कों के बारे में है पर लड़कियां भी इस मामले में कहीं पीछे नहीं हैं। लड़कियां रोजाना 40 से 60 किलोमीटर तक गाड़ी चलाती हैं। अब तो स्कूल-कॉलेज जाने के लिए भी लड़के-लड़कियां दुपहिए दौड़ाने लगे हैं। इन सबका नतीजा यह हो रहा है कि छोटी उम्र में ही दस तरह की शारीरिक व मानसिक परेशानियां होने लगी हैं।

हाथों, अंगुलियों, पैरों, टखनों, घुटनों, गर्दन, आंख, कलाई में दर्द रहने की शिकायत सामने आने लगी है। बाइक चलाते समय लम्बे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने से पीठ दर्द, हाथ एवं अंगुलियां सुन्न हो जाना या फिर अचानक हाथ-पांव में नसें अकड़ने लगती हैं और उनमें खिंचाव आने लगता है।

बाइक चलाते समय बार-बार स्क्रैम्प आना तो खतरे की निशानी है। पीठ से उठा दर्द जब गर्दन से होते हुए कंधों तक पहुंचता है तो बाइक चलाने से कोफ्त होने लगती है। लेकिन क्या करें, कई लोगों के लिए तो बाइक चलाना जरूरत से ज्यादा मजबूरी बन चुकी है। आप अंदाजा लगाइए कि अगर किसी को नौकरी के लिए दिल्ली से गुड़गांव जाना है तो उसकी क्या हालत होती होगी। कॉल सेंटर में काम करने वालों की तो दोगुनी आफत है।

बाइक सवार मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव्स की हालत तो और बुरी हो जाती है, जब घंटों क्लच और ब्रेक दबा दबाकर उन्हें यहां-वहां भागना पड़ता है। लगातार ड्राइविंग से शरीर के विभिन्न हिस्सों में होने वाली परेशानियां भी कई बार दुर्घटना का कारण बन जाती हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि शरीर की थकान दिमाग पर हावी होने से कई बार मानसिक स्थिति काबू में नहीं रहती। आइए नजर डालते हैं कुछ ऐसी ही आम तकलीफों पर जिनसे बाइकर्स आज जूझ रहे हैं।

आंखों को लगी नजर
बाइक सवारों की आंखों को बहुत कुछ झेलना पड़ता है जैसे धूप, हवा, धूल, धुआं और यहां तक कि हवा में उड़ने वाले कीट-पतंगे भी। आंखों में बहुत ज्यादा हवा, धूल, धूप लगने से ‘टरेजियम’ की समस्या पैदा हो जाती है। इससे आंखों से लिसलिसा पदार्थ निकलने लगता है जिसकी वजह से जलन, खुजली और लालिमा की समस्या पैदा हो जाती है।

वहीं लगातार ड्राइव करने की वजह से आंखें शुष्क हो जाती हैं और उनमें जलन होने लगती है। यही वजह है कि कई बार ड्राइव करते समय कुछ क्षण के लिए दिखना भी बंद हो जाता है। इसलिए बाइक सवारों को अपनी आंखों की दोहरी सुरक्षा करनी चाहिए। हेल्मेट के आगे वाइजर तो होना ही चाहिए, उसके अलावा आंखों पर सनग्लासेज भी पहनने चाहिए। यदि लगातार और लंबी ड्राइव कर रहे हैं तो आंखें धोते रहें या आई ड्राप डालें।
विशेषज्ञों के अनुसार अगर चश्मा आंखों पर ठीक से फिट नहीं है तो उससे भी समस्या हो सकती है। अगर चश्मा ढीला होकर आपकी नाक पर सरक आता है तो उससे आपको सामने देखने में कठिनाई हो सकती है। यही कारण है कि करीब 75 फीसदी लोगों को ड्राइव करते समय विजन की दिक्कतें सामने आती हैं।

जाहिर है काम पर जाने या किसी और वजह से बाइक चलानी पड़ रही है तो कोई बात नहीं किन्तु कुछ बातों का खयाल रख कर अपने शरीर को इन तकलीफों से बचाया जा सकता है और स्वस्थ रहा जा सकता है। यदि आप बाइक चलाते हैं तो जरा गौर कीजिए।

टेढ़े बैठे तो ..नाजुक गर्दन गई
करीब दस हजार लोगों में शोध करने पर पाया गया कि गर्दन की समस्याएं अक्सर ठीक ढंग से सवारी (बॉडी का सही पॉस्चर न होना) न करने की वजह से होती हैं। इसमें हेल्मेट को ठीक से न पहनना एक बड़ा कारण माना जाता है। इसकी वजह से कभी-कभी गर्दन में दर्द होने लगता है। ऐसा खासकर तब होता है जब हेल्मेट सिर पर काफी आगे की तरफ हो। अगर हेल्मेट आगे की ओर से नीचे झुका हुआ है तो बाइक सवार को सामने देखने के लिए अपना सिर उठाकर रखना पड़ता है। गर्दन में पीछे की ओर लगातार झुकाव से कई समस्याएं सामने आती हैं। यदि गर्दन की तरफ लगातार दबाव पड़ता है तो आगे चल कर सर्वाइकल की समस्या सामने आती है।

कैसे करें बचाव
- ड्राईविंग करते समय अपना पॉस्चर सही रखें।

- यह सुनिश्चित करें कि बाइक चलाते वक्त आपका हेल्मेट आपके सिर पर ठीक तरीके से फिट हो और उसका झुकाव आगे की ओर न हो।

- गाड़ी चलाते वक्त भारी बैग को अधिक समय तक एक ही कंधे पर ना लटकाए रहें। उसे दोनों कंधों पर बारी-बारी से टांगें।

- मसाज कराने और गर्म पानी से नहाने से रोगी को तात्कालिक आराम मिल सकता है।

- पर्याप्त मात्र में कैल्शियम और विटामिन डी लेना चाहिए तथा नियमित रूप से व्यायाम करें।

- यदि आपके कंधे में सूजन, अंगुली में झनझनाहट, गर्दन दर्द या सिर दर्द है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें क्योंकि इसका संबंध आपकी बाइक ड्राइविंग से हो सकता है।

बाइक से बढ़ता पीठ दर्द 
डॉ. पी.के. दवे, ऑर्थोपेडिक
शोध बताते हैं कि 16 से 24 वर्ष के युवाओं में तीन में से एक को ड्राइविंग के दौरान पीठ दर्द की शिकायत होती है। बाइक चलाने से होने वाली दिक्कतों की वजह से उन्हें आए दिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बाइक चलाते समय लंबे समय तक लगातार कंपन ङोलते रहने की वजह से रीढ़ की हड्डी पर लगातार दबाव पड़ता है।

रीढ़ में दर्द का असर पूरे शरीर पर पड़ता है। ऐसे में चलना-फिरना, उठना-बैठना मुश्किल होता है। जितने अधिक समय तक कोई उच्च स्तर के कंपन पूरे शरीर पर झेलेगा उसकी पीठ के चोटिल होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। दरअसल, बाइक चलाते वक्त ठीक से न बैठना, बाइक के डिजाइन की वजह से उसे चलाने में होने वाली मुश्किलें, बार-बार पीछे देखना और कुछ निजी कारण जैसे सामान्य फिटनेस का स्तर, वजन और आरामतलबी भी पीठ दर्द की वजह बन सकते हैं।

ऐसे करें बचाव
ज्यादा बाइक चलाने से होने वाले पीठ दर्द से बचा जा सकता है। लगातार एक घंटा बाइक चलाने से बचें। अगर किसी वजह से एक घंटे से अधिक बाइक चलानी पड़ भी रही है तो बीच में एक ब्रेक लें। रुक कर अपनी टांगों की स्ट्रैचिंग करें।  ड्राइव करते वक्त अपनी पोजीशन समय समय पर बदलते रहें। ध्यान रखें कि ऐसा करते समय वाहन पर आपके नियंत्रण में कोई कमी न आए। रेड लाइट शरीर को आराम देने के लिए सही जगह है, जहां आप अपने हाथों, कंधों और पैरों को हिला-डुला कर उन्हें सुन्न होने से बचा सकते हैं।

क्लच से कलाई का कबाड़ा
यह कलाई और हाथों में होने वाला एक दर्द विकार है। कॉरपल टनल हाथों की पतली हड्डियों और कलाई के ऊतकों द्वारा बनाई गई एक सुरंग है। यह सुरंग आपकी मंझली तंत्रिका की हिफाजत करती है। मंझली तंत्रिका अंगूठे, तजर्नी, मध्यमा  और अनामिका तक संवेदन का अहसास कराती है, लेकिन जब कलाई की नाजुक हड्डियों और स्नायु पर दबाव पड़ता है तो सूजन बढ़ने लगती है।

दबाव पड़ने की सूरत में इससे संबंधित विभिन्न हिस्से सुन्न पड़ने लगते हैं। बाइक चलाने वालों में यह समस्या अधिक देखने में आती है। अंगुलियों का सुन्न होना एक खतरनाक लक्षण है। अक्सर इसका संबंध कॉरपल टनल सिंड्रोम से होता है। यह उन कई समस्याओं में से एक है जो शरीर के ऊपरी हिस्से को ठीक स्थिति में न रखने से होती है।

सुन्न होने का संबंध कलाई को ठीक स्थिति में न रखने से भी हो सकता है। आमतौर पर कलाई को ऐसे रखना चाहिए की वह बांह की सीध में हो। यदि आपका हाथ बांह से ऊपर मुड़ा हुआ है तो नसों में चुभन हो सकती है, जिससे सुन्न होने की स्थिति उत्पन्न होती है। ऐसा उन लोगों में देखा गया है जो लगातार 2-3 घंटे बाइक चलाते हैं। आमतौर पर देखा गया है कि 8 में से 1 व्यक्ति के साथ यह दिक्कत पेश आती है।

कॉरपल टनल सिंड्रोम के लक्षण
- सिर एवं अंगुलियों में दर्द, हाथ एवं पैर की अंगुलियों में सिहरन, अंगुलियों का सुन्न होना, ग्रिप (पकड़) का ढीला होना, हाथों और कलाइयों में दर्द की शिकायत का बढ़ना आदि।

बचाव के टिप्स
- लेटते समय अपने हाथ के नीचे तकिया रखें।
- अपने हाथों का अत्याधिक इस्तेमाल न करें।
- केवल एक ही हाथ से काम न करें।

डॉ़ विजय शर्मा, नेत्र रोग विशेषज्ञ,
डॉ. सुनील कुमार, हड्डी रोग विशेषज्ञ से बातचीत पर आधारित

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