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समय पर इलाज

सड़क दुर्घटना के बाद घायल का सही से उपचार न हो तो मामूली चोट भी गंभीर रूप ले सकती है। आंकड़े बताते हैं दुनिया भर में सड़क दुर्घटना से होने वाली दस फीसदी मौतें भारत में ही होती हैं। इतना ही नहीं, वर्ष भर में देश में कुल 12 लाख 75 हजार लोग केवल सड़क दुर्घटनाओं में घायल हो जाते हैं।

यह आंकड़े दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन द्वारा कराए गए सर्वे के हैं। घायलों को समय पर सही उपचार न मिले तो मामूली फ्रैक्चर भी गंभीर रूप ले सकता है। इसके अलावा भी और समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में आपको कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।


- सड़क दुर्घटना के दौरान सबसे ज्यादा सिर में चोट लगती है जिसकी वजह से व्यक्ति की घटनास्थल पर ही मौत हो जाती है। ऐसी स्थिति से बचने के जरूरी है कि दुपहिया वाहन चलाते समय हमेशा अच्छी क्वालिटी का हेल्मेट पहनें।

- गंभीर दुर्घटना होने पर कभी भी घायल को तुरंत उठाकर न बैठाएं। गंभीर हालत में घायल को पानी पिलाना भी घातक साबित होता है क्योंकि कई बार इसकी वजह से लकवा भी पड़ सकता है।

- गंभीर रूप से चोटिल होने पर यह चेक करना चाहिए कि घायल ठीक से सांस ले पा रहा है या नहीं। उससे बोल कर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसके गले में कोई गंभीर चोट तो नहीं है।

- ऐसी स्थिति में सबसे पहले नजदीक वाले अस्पताल से एंबुलेंस बुला लें, क्योंकि एंबुलेंस के स्टाफ को घायल को ट्रांसफर करने की ट्रेनिंग दी गई होती है।

- घायल को ट्रांसफर करने करने में लापरवाही के चलते साधारण सी चोट भी गंभीर रूप धारण कर सकती है। ऐसी स्थिति में भरपाई होने में ज्यादा समय लग जाता है।

- हड्डी टूटने पर उस भाग को ज्यादा न हिलाएं। अस्पताल ले जाने के वक्त प्रभावित हड्डी को कोई न कोई स्पोर्ट अवश्य दें। यह स्पोर्ट लकड़ी या गद्दे से भी दी जा सकती है।

- साधारण फ्रैक्चर होने पर प्लास्टर के जरिए ही हड्डी जुड़ जाती है, लेकिन प्लास्टर के बाद भी हर हफ्ते चेकअप कराना चाहिए। एक बात और ध्यान देने वाली है कि प्लास्टर में खुजली होने पर उनसें सलाई आदि न डालें और दर्द बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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