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बीएसएनएल कर्मी 20 अप्रैल से बेमियादी हड़ताल पर

सार्वजनिक क्षेत्र की बडी़ कंपनियों में विनिवेश के फैसले के खिलाफ सभी नौ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भारतीय संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और कोल इंडिया लिमिटेड में हड़ताल का आह्वान किया। इसे देश की सरकारी कंपनियों को बर्बाद करने की सुनियोजित साजिश करार दिया हैं।

अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) के नेताओं गुरूदास दासगुप्ता और डी एल सचदेवा ने संवाददाताओं को बताया कि कोल इंडिया लिमिटेड की तीन दिन की हड़ताल 15 मई से शुरू होंगी। जबकि बीएसएनएल के कर्मचारी 20 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे।

दासगुप्ता और सचदेवा ने कहा कि यह पहली बार है जब भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) और भारतीय मजादूर संघ (बीएमएस) समेत सभी नौ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने विनिवेश के मुद्दे पर सार्वजनिक क्षेत्र की इन दो कंपनियों में हड़ताल का आह्वान किया है।

इससे पहले इन ट्रेड यूनियनों ने अपनी पांच सूत्री मांगों के लिए गत पांच मार्च को (जेल भरो) आंदोलन किया था। उनकी मांगों में विनिवेश का विरोध महंगाई, बेरोजगारी, श्रम कानूनों का उल्लंघन और असंगठित क्षेत्र के कामगारों की सामाजिक सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय कोष का निर्माण शामिल हैं।

मजदूर संघ सीटू के नेता एम के पांधे ने कहा कि मजादूर कोल कंपनी में विनिवेश और इसे निजी हाथों में सौंपने का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया में हड़ताल होने से ऊर्जा संयंत्रो में विद्युत उत्पादन बाधित होने की संभावना है।

बीएमएस के महासचिव एन लक्ष्मा रेड्डी ने कहा कि सरकार ने कोल इंडिया में 30 प्रतिशत विनिवेश के लिए नोटिस दे दिया हैं। जिसके विरोध में हड़ताल बुलाई गई हैं।

नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख संचार कंपनी बीएसएनएल की कार्यप्रणाली में मजबूती के लिए सैम पित्रोदा समिति का गठन किया था।

जिसने 30 प्रतिशत कर्मचारियों को हटाने की सिफारिश की। उन्होंने कहा कि इन सिफारिशों में एक लाख कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के दायरे में लाया जा रहा है।

 

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