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चीनी हैकरों ने भारत के अति-गोपनीय दस्तावेजों में सेंध लगाई

चीनी हैकरों ने भारत के अति-गोपनीय दस्तावेजों में सेंध लगाई

चीनी हैकरों ने भारतीय रक्षा मंत्रालय के कई अति गोपनीय दस्तावेजों में सेंध लगा ली है जिससे देश की प्रमुख मिसाइलों तथा हथियार प्रणालियों के प्रभावित होने की आशंका है। चीनी हैकरों ने न केवल भारतीय रक्षा मंत्रालय बल्कि दुनियाभर के कई दूतावासों की बेहद गोपनीय फाइलों को हैक कर लिया है।

यूनिवर्सिटी आफ टोरंटो में कनाडाई तथा अमेरिकी शोधकर्ताओं ने अपनी नयी रिपोर्ट 'शैडो इन दी क्लाउडस' में दावा किया है कि चीन के एक जासूसी ऑपरेशन शैडो नेटवर्क की इस सेंधमारी का शिकार बनी प्रणालियों में हाल ही में शुरू की गई भारतीय सेना की उन्नत तोपखाना नियंत्रक प्रणाली शक्ति और देश की नई मोबाइल मिसाइल रक्षा प्रणाली आयरन डोम तक शामिल है।

आठ महीने की जांच के बाद रपट का दावा है कि चीन के विभिन्न हिस्सों से की गई इस व्यवस्थित साइबर जासूसी ने भारत सरकार, व्यापार, शैक्षणिक और अन्य कम्प्यूटर प्रणालियों को प्रभावित किया है। प्रभावित होने वाली प्रणालियों में बेल्जियम, सर्बिया, जर्मनी, इटली, कुवैत, अमेरिका, जिम्बाब्वे के भारतीय दूतावास, ब्रिटेन और साइप्रस स्थित भारतीय उच्चायोग के कम्प्यूटर शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, इनमें दलाई लामा के कार्यालयों और भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा प्रतिष्ठानों की एजेंसियों के दस्तावेज शामिल हैं। रिपोर्ट कहती है कि कई अन्य देशों के नागरिकों के संवेदनशील सूचना वाले आंकड़े और उनके व्यक्तिगत, वित्तीय और व्यावसायिक सूचनाओं तक सेंध लगाई गई और जांच के दौरान उन्हें बरामद किया गया।

रिपोर्ट में कहा गया कि आंकड़ों की बरामदगी और विश्लेषण में पाया गया कि एक दस्तावेज गोपनीय राजनयिक पत्र जैसा था, वहीं दो दस्तावेजों पर गुप्त, छह पर प्रतिबंधित और पांच पर गोपनीय के निशान लगे थे। इन दस्तावेजों में भारतीय सुरक्षा परिषद कार्यालय के एक सदस्य से ली गईं संवेदनशील सूचनाएं हैं जिसमें असम, मणिपुर, नागालैंड और त्रिपुरा राज्यों में भारत की सुरक्षा हालातों और माओवादियों तथा नक्सलियों के बारे में खुफिया मूल्यांकन हैं।
   
इसके अलावा इसमें भारत के अतंरराष्ट्रीय संबंधों एवं पश्चिम अफ्रीका, एस-सीआईएस देशों और मध्य पूर्व में गतिविधियों के मूल्यांकन और वीजा आवेदन, पासपोर्ट कार्यालय सर्कुलर और राजनयिक पत्राचार के बारे में भारतीय दूतावासों की सूचनाएं शामिल है।
   
हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि इस बात के कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नही हैं कि ये सूचनाएं भारत सरकार के कम्प्यूटरों से ही चोरी की गईं। ये निजी कम्प्यूटरों में कॉपी किए जाने का परिणाम हो सकती हैं।

बरामद किए गए दस्तावेजों में निम्नलिखित परियोजनाओं के बारे में सूचनाएं है: विमानरोधी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली - पेचोरा मिसाइल प्रणाली, मोबाइल मिसाइल रक्षा प्रणाली - आयरन डोम मिसाइल प्रणाली और तोपखाना नियंत्रक प्रधाली - शक्ति परियोजना।

रिपोर्ट में पाया गया कि जासूसों ने भारत के अफगानिस्तान स्थित राजनयिक मिशन में जमा किए गए वीजा आवेदनों की सूचनाओं को भी खंगाल डाला। शोधकर्ताओं ने कहा कि इन जासूसों की मंशा के बारे में कोई साफ जानकारी नही मिल पाई, पर इनमें वे विषय शामिल हैं जो भारतीय और तिब्बती समुदायों के हित के हो सकते हैं।

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