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शिक्षा अधिकार कानून के तहत बच्चों को मिली पहली सौगात

नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा कानून लागू होते ही जनपद के परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को इसका लाभ  मिलना शुरू हो गया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत एक से आठवीं तक के बच्चों का परीक्षा शुल्क समाप्त कर दिया है। इस बाबत बेसिक शिक्षा सचिव ने विभागीय अधिकारियों को आदेश जारी कर दिए हैं।

जिले के प्राइमरी व अपर प्राइमरी विद्यालयों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को अब परीक्षा शुल्क नहीं देना होगा। अब तक बेसिक स्कूलों के पहली से पांचवी क्लास तक के बच्चों को 5 रुपए व छटवीं से आठवीं के बच्चों को पंद्रह रुपए परीक्षा शुल्क देना पड़ता था। परिषदीय स्कूलों में कई छात्र तो ऐसे थे जिन्हें परीक्षा शुल्क के पंद्रह रुपए तक देना भारी पड़ता था।

मगर प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब छात्रों के लिए नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा शिक्षा कानून खुशियों की सौगात लेकर आया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेश कुमार श्रीवास ने बताया कि नि:शुल्क शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत परिषदीय स्कूलों के 1 से 8वीं कक्षा तक के बच्चों को अब परीक्षा शुल्क नहीं देना पड़ेगा। बेसिक शिक्षा सचिव की ओर से बच्चों से परीक्षा शुल्क नहीं लिए जाने को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं। इससे बेसिक स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को लाभ मिलेगा।

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