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मल्टीटास्किंग कब नुकसानदेह हो जाती है

आधुनिक कार्यस्थलों पर खुद को जल्द साबित करने की होड़ में युवा अपनी बहुआयामी छवि पेश करने का प्रयास करते हैं, लेकिन इसका सीधा असर उनकी कार्यकुशलता पर पड़ता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि किसी भी कार्य को उसकी प्राथमिकता के अनुसार ही करना चाहिए, यही संगठन और व्यक्ति के हित में होता है। आइए जानें कैसे

ऑफिस में यह दृश्य बिलकुल आम बन चुका है। किसी की कंप्यूटर स्क्रीन भी देखें, एक समय में एक साथ तीन से चार विंडो खुली दिखाई दे जाती हैं, बीच-बीच में इंस्टेंट मैसेंजर की पॉपिंग भी जारी रहती है। एक तरफ नए ई-मेल की सूचना आती रहती है, तो दूसरी ओर मोबाइल फोन पर घंटियां बजती रहती हैं।
फिलिप्स इंडिया के मुरली सिवरमण के अनुसार, ‘मेरी 15 वर्षीय बेटी, परीक्षा की तैयारी कर रही है, पर साथ ही संगीत भी बज रहा होता है, कंप्यूटर पर चैट भी जारी होती है और लगातार फोन भी आ-जा रहे होते हैं। मुझे यह देखकर आश्चर्य होता है। मैं खुद को इस तरह की मल्टीटास्किंग (एक साथ कई काम) के लिए असमर्थ पाता हूं।’ हालांकि वह कहते हैं कि ऑफिस मीटिंग के दौरान जब वे किसी को फोन पर टाइप करते देखते हैं, तो उन्हें बड़ी झुंझलाहट होती है। 2477 तारों से जुड़ी इस इलेक्ट्रॉनिक और तकनीकी दुनिया की यही सचाई बन चुकी है। अधिकतर हम सभी एक समय में कई काम कर रहे होते हैं। या यूं कहें कि सिवरमण की किशोर बेटी की तरह किस्तों और टुकड़ों में जी रहे हैं। दिल्ली की एक कंसल्टिंग कंपनी मिलग्रो बिजनेस सॉल्यूशन के सीईओ राजीव करवाल के अनुसार, कार्य पर मल्टीटास्किंग की मांग नाटकीयता के ढंग से बढ़ रही है। एक साथ हमसे कई काम करने की अपेक्षा बढ़ती जा रही है। ‘ऐसा लगता है मानों आप एक पल में आसमान की ऊंचाई माप रहे होते हैं और दूसरे ही पल आपको समुद्र की गहराइयों में उतरकर एक छोटी सी मछली को पकड़ने के लिए कहा जाता है।’ पर वह मानते हैं कि ऑफिस में कई चीजें ऐसी होती हैं जो एक साथ आपका ध्यान आकर्षित करती हैं।

हमेशा सही नहीं
मल्टीटास्किंग के गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं। कई अध्ययनों में यह बात साबित की जा चुकी है कि मल्टीटास्किंग कार्यकुशलता को प्रभावित करती है, काम का दबाव बढ़ता है और तनाव भी उत्पन्न होता है। यहां तक कि हमेशा मल्टीटास्किंग होना किसी व्यक्ति के इंटैलिजेंस क्योशेंट (आईक्यू) को कम कर देता है। वर्ष 2005 में एक आईटी कंपनी में कार्यस्थल व्यवहार पर अध्ययन किया गया। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया के कंप्यूटर साइंस के इन्फॉरमेटिक्स विभाग की प्रोफेसर ग्लोरिया मार्क द्वारा किए गए इस अध्ययन के अनुसार बीच में छोड़े हुए काम पर दोबारा फोकस बनाने में 25 मिनट का समय लगता है। वर्ष 2008 में बिजनेस कोच डेव क्रैनशॉ की प्रकाशित पुस्तक ‘द मिथ ऑफ मल्टीटास्किंग’ के अनुसार, ‘एक साथ सब काम करने का मतलब है किसी भी काम का पूरा नहीं होना।’
अब ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि कार्यस्थल पर हमें कई काम करने होते हैं। सभी को पूरा करने के लिए अलग-अलग जरूरतें होती हैं, जटिलता का स्तर होता है और आपको अलग-अलग समय देना जरूरी होता है।
ऐसे में ऑफिस में आप कैसे एक समय में कई काम कर सकते हैं?

प्राथमिकता तय करें
सतही तौर पर देखने में भले ही ऐसा लगे कि कई सफल एक्जीक्यूटिव्स एक साथ कई काम करते हैं, पर उनसे बात करके आप यह सहज ही जान पाएंगे कि अधिक उत्पादकता पूरी तरह एक अनुशासित और क्रमबद्ध प्रक्रिया है। करवल कहते हैं कि एक साथ कई योजनाओं को पूरा करने के लिए वह एमएमएल यानी हाई, मीडियम और लो (उच्च, मध्यम और निम्न) का रूल अपनाते हैं। इतना ही नहीं, उनकी 30 लोगों की टीम भी यही तरीका अपनाती है। एचएमएल का मतलब है काम को प्राथमिकता के आधार पर बांटना। सबसे जरूरी काम को सबसे पहले पूरा करें। यह प्राथमिकता काम पूरा करने की अंतिम समय-सीमा पर निर्भर करती है। वह कहते हैं, ‘मैं इसके लिए हर रोज कैलेंडर पर निशान लगाता हूं और प्रतिदिन डेस्क प्लानिंग करता हूं। डेस्क प्लानिंग का आशय सबसे अधिक जरूरी और कठिन काम की पहचान करने से है। सबसे जरूरी काम को डेस्कटॉप पर रख लेता हूं, ताकि उसके छूटने की आशंका ना रहे।’ यदि आपको एक साथ कई काम पूरे करने की घबराहट है, तो उस तनाव से बचने का सबसे अच्छा उपाय है कि आप यह लिख कर रखें कि आपकी घबराहट का क्या कारण है? आप उससे क्यों बचना चाहते हैं?

एकाग्रता जरूरी
बेंगलुरू की हरीश बिजूर कंसल्ट कंपनी के सीईओ हरीश बिजूर के अनुसार, ‘यह सही है कि मुझे अपने चार कार्यालयों के प्रशासनिक कार्यो के प्रबंधन के लिए एक साथ कई काम करने होते हैं, पर जब भी किसी रचनात्मक और बेहद महत्वपूर्ण काम को पूरा करना होता है, तो मैं पूरी तरह उसी काम पर फोकस करता हूं और खुद को बाधा पहुंचाने वाले वातावरण से दूर रखने की कोशिश करता हूं। मुझे सोच-समझकर कई तरह की योजनाएं बनानी होती है, मैं खुद को कमरे में बंद करके अपने केबिन के दरवाजे पर ‘डू नॉट डिस्टर्ब’ का बोर्ड लगा देता हूं। मेरे ऑफिस में काली ब्लांइड्स लगी हुई हैं। मैं कम रोशनी में ज्यादा बेहतर तरीके से सोच पाता हूं। उस दौरान कंप्यूटर को बंद कर देता हूं। फोन को वॉइस रिकॉर्ड मोड में रखता हूं।’

संरक्षकों की नियुक्ति
आर्टिमिस हेल्थ इंस्टीटय़ूट, गुड़गांव में प्रमुख कार्डियोरेसिक सजर्न और सीईओ कुशाग्र कटारिया के अनुसार, ‘आप सभी काम खुद नहीं कर सकते। मेरे पास कुछ ऐसे अच्छे लोगों की टीम रहती है, जो इसमें मेरी मदद करती है। जब मैं अति महत्वपूर्ण काम कर रहा होता हूं, तो वे स्वयं अपने स्तर पर छोटे-छोटे काम पूरे कर लेते हैं। इस काम के लिए आप तकनीक उपकरणों की मदद ले सकते हैं।’ बजूर कहते हैं, ‘यह संरक्षक डिजिटल भी हो सकते हैं। मेरे मोबाइल फोन मेंवॉइस मैसेज है। कॉल को डाइवर्ट मोड में रखता हूं, जिससे वे मेरे एसोसिएट्स के पास पहुंच जाती है।’
कई सारे सॉफ्टवेयर और उपकरण ऐसे हैं जो बाधा उत्पन्न करने वाले कारकों से हमारी दूरी बनाए रखने में मदद करते हैं। मैक और आईफोन यूजर्स के लिए एक राइटरूम होता है। एक फुलस्क्रीन राइटिंग एनवायर्नमेंट, जो आपको बिना किसी बाधा के लेखन में फोकस्ड रहने में मदद करता है। माइक्रोसॉफ्ट से आईबीएम तक, आईटी कंपनियां अब ‘अटैंशन यूजर इंटरफेस’ बनाने में लगी हैं, जिससे ऑन स्क्रीन बाधाओं को कम करने में मदद मिलेगी। इसमें इंस्टेंट मैसेजिंग का जवाब देने के अलावा ऐसे प्रोग्राम शामिल होंगे जो ई-मेल को प्राथमिकता के अनुसार वर्गीकृत कर सकेंगे।

बाधाओं को दूर करें
वर्ष 2008 में न्यूयॉर्क रिसर्च फर्म बेसेक्स द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार ऑफिस में काम से ध्यान हटाने वाली बाधाएं एक सामान्य कर्मचारी के 2.1 घंटे का समय ले लेती हैं। कीमत में इसका मूल्यांकन करें तो एक साल में उत्पादकता का यह नुकसान 28 अरब डॉलर के लगभग बैठता है। आधुनिक खुले कार्यालय टीम-भावना विकसित करने की दृष्टि से तो अच्छे हैं, पर इस काम में अवरोध भी उत्पन्न होते हैं। किसी एक कर्मचारी द्वारा बोली गई बात सबके द्वारा सुनी जाती है, किसी एक की रिंग टोन सबको परेशान कर देती है।
कैलिफोर्निया में बिजनेस कंसल्टिंग और प्रोफेशनल इंफोगेन कॉरपोरेशन के ग्लोबल हेड पंकज शंकर के अनुसार, ‘भारत में एनसीआर स्थित केंद्र में इस तरह व्यवस्था की गई है कि काम के दौरान बाधा पहुंचाने वाले तत्वों को कम से कम किया जा सके। हर व्यक्ति के पास अलग फोन ना रखकर पूरे ग्रुप के पास एक फोन रखा गया है। इसी तरह मीटिंग्स के लिए अलग रूम बनाए गए हैं, ताकि दूसरे कर्मचारी परेशान ना हों।’ अमेरिका स्थित मुख्यालय की आईटी सेवा कंपनी बैरी वेमिलर इंटरनेशनल रिसोर्स  के चेन्नई और मुबंई स्थित ऑफिस के वाइस प्रेजिडेंट सेंथिल कुमार के अनुसार, ‘टीम सदस्यों को भी किसी तरह बाधा ना पहुंचे, वह अपना काम पूरा ध्यान लगाकर कर सकें, इसके लिए हमने कार्यस्थल पर कुछ नीतियां बनाई हुई हैं। सोशल नेटवर्किग, ब्लॉगिंग और मेसेज पर रोक लगाने के अलावा कार्यस्थल पर कुछ नियमों का पालन किया जाता है जैसे शोर-शराबे वाली रिंग टोन से परहेज करना या फिर मीटिंग के दौरान फोन साइलेंस मोड पर रखना आदि।’

अंत में
दिल्ली स्थित मैक्स हेल्थकेअर के मुख्य साइकायट्रिस्ट समीर पारेख के अनुसार, ‘मल्टीटास्किंग तनाव को जन्म देती है, इसका प्रमुख कारण यह होता है कि हर काम की अपनी उपयोगिता होती है। जटिलता का अपना स्तर होता है, जिसके लिए अलग-अलग तरह के लोगों से मिलना-जुलना होता है। इसके एक साथ सभी काम खुद ना करते हुए कार्यो की प्राथमिकता तय करना और दूसरों को काम सौंपना तनाव को कम करने का सबसे अच्छा माध्यम है। यहां आपको यह भी पता होना जरूरी है कि आपको कब और अधिक काम के लिए मना कर देना चाहिए।’
करवाल भी इस बात से सहमति रखते हैं। उन्होंने इस संबंध में मिलग्रो की नीतियों का उल्लेख किया, जिसके अनुसार किसी कर्मचारी को रविवार के दिन तंग नहीं किया जाता। खुद अपने लिए, वह कहते हैं, ‘मैं रात्रि 11:30 पर अपने सभी तरह के कम्युनिकेशन लिंक्स को बंद कर देता हूं। सुबह साढ़े छह बजे, जब पूरी तरह फ्रैश होता हूं, तो नए दिन के लिए काम करना शुरू कर देता हूं।’

प्रबंधकों के लिए कुछ उपयोगी सॉल्यूशंस विशेषज्ञों के अनुसार कंपनी के प्रबंधक सभी काम खुद नहीं कर सकते। उन्हें अपने कर्मचारियों को वर्तमान जरूरतों की चुनौतियों का सामना करने के लिए निर्देश, तकनीक व सॉल्यूशंस उपलब्ध कराने
ही होंगे।
- ऑफिस में कार्य के दौरान उत्पादकता बढ़ाने के लिए मल्टीटास्किंग के स्थान पर तकनीक और वर्क फ्लो सॉल्यूशंस में निवेश करें।
- तकनीक के इस्तेमाल के संबंध में स्पष्ट निर्देश बनाएं। साथ ही नई तकनीक के बारे में स्टॉफ को प्रशिक्षण भी दें।
- प्रोफेशनल नेटवर्किग सॉल्यूशंस का इस्तेमाल करें।

यूं करें मल्टी टास्किंग को मैनेज
- एक समय में एक काम पर पूरा ध्यान लगाएं। पहला काम पूरा करने के बाद ही दूसरे काम की शुरुआत करें।
- जो काम कर रहे हैं उससे संबंधित पेपर ही अपने पास रखें। दूसरे काम के पेपरों को डेस्क पर इधर-उधर फैला कर रखने की बजाए एक जगह समेट कर अलमारी में रखें। इससे आपका  ध्यान नहीं बटेगा।
- यदि आप किसी बातचीत के मध्य में हैं, तो पहली बात पूरी करने के बाद ही दूसरी बात शुरू करें।
- अपनी क्षमताओं को पहचानें और उसके अनुसार ही नए काम की जिम्मेदारी अपने ऊपर लें।
- यदि आप एक काम पर अपना पूरा ध्यान लगाते हैं तो काम पूरा होने पर आपको संतुष्टि मिलेगी और दूसरे काम को भी आप अच्छी तरह एंज्वॉय कर सकेंगे।
- दिन में कुछ समय अपने काम की योजना बनाने में अवश्य दें। ऐसा नहीं करने पर आप हमेशा जल्दबाजी में रहते हैं। योजना बनाकर पहले से यह निर्धारित कर लें कि आपके लिए क्या जरूरी है और किस कार्य को आप पहले करना चाहेंगे। अपने सबसे जरूरी काम पर पूरा समय दें।
- दोपहर के खाने का समय खुद को रिलेक्स करने और खाने में ही लगाएं। उस दौरान ऑफिस की बात ना करें।
- मल्टी टास्किंग से उत्पन्न तनाव को कम करने का अच्छा तरीका है कि आप अपने जीवन को आसान और सामाजिक भी बनाएं।

मल्टीटास्किंग से याद्दाश्त पर पड़ने वाले प्रभाव पर यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया के प्रोफेसर हाल पैशलर कहते हैं, यदि आप गाड़ी चलाते समय फोन पर बात कर रहे हैं, तो यह संभव है कि एक्सीडेंट ना हो, पर आप यह भूल सकते हैं कि आपने कार कहां पार्क की थी।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के सर्वे के अनुसार एक समय में एक काम करने वालों की तुलना में मल्टीटास्कर अधिक महत्वपूर्ण सूचनाओं पर बेहतर तरीके से काम नहीं कर पाते।

अमेरिका की एक कंपनी के अनुसार किए गए सर्वे में 54 प्रतिशत कर्मचारियों ने माना कि वे फोन पर बात करते हुए ई-मेल पढ़ रहे होते हैं। 11 प्रतिशत का कहना है कि वे मीटिंग के दौरान किए जाने वाले काम की लिस्ट बना रहे होते हैं।

कैलिफॉर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकों के अनुसार एक कर्मचारी को फोन काल, ई-मेल का जवाब देना या फिर छोड़े हुए काम को दोबारा पूरा करने की प्रक्रिया में औसतन 25 मिनट लगते हैं।

एक अध्ययन के अनुसार काम के दौरान जो कर्मचारी बार-बार ई-मेल और फोनकॉल से पीड़ित रहते हैं, उनके आईक्यू में मेरीयुआना का सेवन करने वालों की तुलना में दोगुनी कमी आती है।
-साथ में पूनम जैन

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