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नपा-तुला बोलें

अक्सर हमारी मुलाकात ऐसे लोगों से होती है, जिनको बात करते देख हमारा मन अपने बातचीत के अच्छे सलीके के लिए माता-पिता को आभार व्यक्त करने का करता है। हममें से लगभग 70 प्रतिशत लोगों का सामना ऐसे लोगों से होता है जिनका व्यवहार देखकर मन घृणा से भर जाता है। कुशल संचार क्षमता अतिमहत्वपूर्ण है। आप माने या ना माने, हम सभी का मूल्यांकन ना सिर्फ इस बात से होता है कि हम क्या बोलते हैं, बल्कि इस बात से भी होता है कि हम किस तरीके से बोलते हैं।
टोस्टमास्टर्स इंटरनेशनल स्पीकिंग ऑर्गेनाइजेशन के संस्थापक डॉ. राल्फ सी. स्मैड्ले के अनुसार हमारी बातें हमारी छवि का निर्माण करती हैं। अपनी बातों से हम अपना वास्तविक चरित्र पेश करते हैं, जो किसी कलाकार द्वारा बनाए गए किसी भी चित्र से अधिक वास्तविक और सच्चा होता है। बेहतर और सकारात्मक संचार के कुछ उपाय-
ध्वनि जांच: यदि आप अपने दोस्तों के बीच हैं तो किसी भी तरीके से बात कर सकते हैं। पर सार्वजनिक स्थल, खासतौर पर ऑफिस में बातचीत के दौरान अपनी आवाज को धीमा ही रखना चाहिए। अपने सहकर्मियों की सहूलियत और उनकी निजता का ध्यान रखें। तेज हंसना या किसी धुन को तेज-तेज गुनगुनाना पसंद नहीं किया जाता।
फोन पर बातचीत: फोन पर विनम्रता से बात करें। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किसी पेशेवर व्यक्ति से बात कर रहे हैं या फिर किसी नजदीकी संबंधी से। हमेशा धीमी आवाज में ही बात करें। लंबी अवधि की कॉल के लिए मीटिंग रूम का इस्तेमाल करें अथवा ऑफिस से बाहर जाकर बात करें।
आम भाषा में बात करें: ऐसी भाषा में बात ना करें, जिससे आपके ग्रुप के अधिकतर सदस्य परिचित नहीं हैं। या फिर उसमें बातचीत करने में असुविधा महसूस करते हैं।
बड़बड़ाना: मात्र अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए कुछ भी बड़बड़ाना अच्छा नहीं। बेकार बोलकर अपनी छवि बिगाड़ने से बेहतर है कि चुप रहें। इसी तरह यदि आप बातचीत से संबंध नहीं रखते, तो तब तक राय व्यक्त ना करें जब कि आपसे पूछा ना जाए।

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