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बच्चों से व्यवहार

अकसर अभिभावकों को अपने बच्चों की बड़ी चिंता रहती है कि वे कहीं बिगड़ न जाएं। उन्हें वे हर समय कुछ अच्छी बातें सिखाने की कोशिश भी करते रहते हैं। लेकिन जरा सी असावधानी आपके बच्चों को सुधार की तरफ ले जाने की बजाय बिगाड़ने की तरफ न ले जाए, इसका भी ध्यान आपको रखना होगा।
- अगर आप बच्चों से उनकी उम्र से ज्यादा की बड़ी समझधारी दिखाने की उम्मीद पालते हैं तो इससे परेशानियां और बढ़ेंगी।
- अकसर माता-पिता अपने छोटे बच्चों से उम्मीद रखते हैं कि वह समय पर शौच जाना और समय पर खाना सीखे और बच्चा अगर यह नहीं सीखता तो वे परेशान हो जाते हैं। छह साल का बच्चा बिस्तर गीला कर देता है या किशोर बच्चों के स्वभाव में बदलाव आने लगते हैं। यह बदलाव या समस्याएं स्वाभाविक हैं। यह बातें समस्या नहीं बल्कि बच्चों के विकास का हिस्सा हैं।
- कभी आप अपने लाडले से बेहद सख्ती से पेश आते हैं तो कभी देखते ही नहीं कि वह क्या कर रहा है। ऐसे में बच्चों की स्थिति भी असमंजस भरी होती है कि उसे क्या करना चाहिए और आपको उससे क्या उम्मीदें हैं। इसके लिए जरूरी है कि उसके प्रति व्यवहार को लेकर आप ज्यादा चौकस रहें।
- अक्सर आप बच्चों को उनकी मनमानी करने देते हैं, यह सोचकर कि वे आपकी तरफ ज्यादा झुकेंगे। मगर पाबंदियां न होने पर ज्यादातर बच्चों के लिए यह स्थिति काफी कठिन हो जाती है। इसलिए बेहतर होगा कि उनके लिए कुछ नियम तय करें।
बच्चों से बहस न करें
बच्चों की गलतियों को लेकर उनसे झगड़ना या बहस करने से कोई हल नहीं निकलता इससे हालात और बिगड़ते हैं। बच्चों पर इसका बुरा असर पड़ता है। ऐसे वक्त समझदारी से पेश आने की जरूरत होती है।
नए तरीके अपनाएं
बच्चों को सुधारने के लिए एक ही तरीके पर टिके रहने से काम नहीं चलता। समस्याओं को सुलझाने के लिए हर बार नया तरीका ढूंढ़ना पड़ता है। ध्यान रहे बच्चों सिर्फ पिटाई करने से अनुशासन में नहीं रहते, बल्कि कई बार जिद्दी हो जाते हैं। थोड़ी पाबंदी, कुछ अनुशासन और विकल्पों में कटौती से बच्चों का विकास आसान हो जाता है।

 

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