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विद्यापीठ कार्यपरिषद के निर्णय को हाईकोर्ट ने अवैध ठहराया

इलहाबाद हाई कोर्ट ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कार्यपरिषद द्वारा 2009 में हिन्दी विभाग में प्रवक्ता पद के हुई चयन समिति की वैधता पर लिए गए निर्णय को अवैध करार दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस मामले पर निर्णय लेने का अधिकार चांसलर को है। न्यायमूर्ति सुनील अम्बवानी और न्यायमूर्ति काशीनाथ पांडेय ने यह निर्णय प्रवक्ता पद के अभ्यर्थी अनुकुल चंद राय की याचिका पर दिया है। इस बाबत विद्यापीठ के कुलसचिव आईपी झा का कहना है कि उन्हें अभी माननीय न्यायालय के निर्देश की अधिकृत कापी नहीं मिली है, लेकिन इस मामले को चांसलर के पास पहले ही भेज दिया गया है।

गौरतलब है नियुक्ति और प्रोन्नति सम्बन्धी यह मामला पूर्व कुलपति प्रो.सुरेंद सिंह कुशवाहा के कार्यकाल का है। प्रो.कुशवाहा के कार्यकाल में खाली पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति और प्रोन्नति को लेकर मामला काफी दिनों से न्यायालय में लम्बित है। चयन समितियों की संस्तुतियों वाले लिफाफे अभी तक खोले नहीं जा सके हैं। जिससे करीब 2 दजर्न शिक्षको सहित अन्य अभ्यर्थियों के मामलों का निस्तारण नहीं हो सका है। जिसको लेकर शिक्षको में निराशा है।

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