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दीक्षांत समारोह में हो भारतीयता का पुट: प्रो. बीएम शुक्ल

केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश द्वारा भोपाल स्थित भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के दीक्षांत समारोह के दौरान गाउन उतारने की घटना ने शिक्षा जगत में बहस छेड़ी है। पर्यावरण मंत्री के इस कथन को कि गाउन औपनिवेशिक मानसिकता का प्रतीक है को शिक्षाविदों ने सही माना है। उनका कहना है कि दीक्षांत समारोह में भारतीयता का पुट होना चाहिए। कुछ का यह भी कहना है कि जिस प्रकार हमनें अंग्रेजों की कई अच्छी बातों को स्वीकार किया है उसी प्रकार गाउन परंपरा को भी स्वीकार कर लेना चाहिए। हालांकि आम राय यह थी कि केन्द्रीय मंत्री का अपनी बात कहने का तरीका ठीक नहीं था।

बीएचयू के पूर्व कुलपति और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक प्रो. पंजाब सिंह मानते है कि केन्द्रीय मंत्री की बात तो ठीक है लेकिन उसे कहने का तरीका ठीक नहीं था। दीक्षांत समारोह बहुत महत्वपूर्ण अवसर होता है। निश्चित रूप से गाउन को और सिम्पल किया जा सकता है। यह एक प्रकार का डेकोरेशन होता है और दीक्षांत समारोह जैसे विशेष अवसर पर कुछ विशेष परिधान होना चाहिए।

नगालैण्ड विश्वविद्यालय के चांसलर और बीएचयू के एमेरिटस प्रोफेसर एमएस कानूनगो कहते है कि समारोह के बीच में गाउन उतारकर फेंक देना अनुशासहीनता है। इस मुद्दे पर समारोह से पहले या बाद में बहस हो सकती थी। मेरे विचार से दीक्षांत समारोह में गाउन की परंपरा उसी प्रकार स्वीकार कर लेनी चाहिए जिस प्रकार अंग्रेजों की बहुत सी अच्छी चीजें हमनें स्वीकार की है। हम गाउन को अपनी परंपरा के हिसाब से बदल सकते है।

गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. बीएम शुक्ल का मानना है कि जयराम रमेश ने मुद्दा तो गौर करने लायक उठाया है लेकिन तरीका ठीक नहीं है। निश्चित तौर पर दीक्षांत समारोह किसी भी शिक्षण संस्थान के लिए यादगार लम्हा होता है और इस दिन परिधान भी विशेष होना चाहिए लेकिन जरूरी नहीं कि हम गाउन या हुड पहनें। विश्वविद्यालय स्तर पर रमेश जी ने इस ओर ध्यान आकर्षित किया है, यह अच्छी बात है। दीक्षांत समारोह में भारतीयता का पुट होना चाहिए।

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