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बैकडोर से हुई नियुक्तियां फिर बनी परेशानी का सबब

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति को तलब किया। न्यायालय ने यह निर्देश कर्मचारियों की याचिका पर दिया है। इन कर्मचारियों के समायोजन को विश्वविद्यालय प्रशासन ने निरस्त कर दिया था। न्यायमूर्ति अरूण टंडन की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि कुलपति एक शपथपत्र के साथ स्पष्ट करें कि 29 दिसंबर 2005 को जारी शासनादेश के मुताबिक समस्त नियमतिकरण या समायोजन को निरस्त किया गया है या सिर्फ याचिकाकर्ताओं का। यह आदेश 31 मार्च को दिया गया था। इस बाबत कुलसचिव आईपी झा का कहना है कि उन्हें अभी निर्देश की अधिकृत कापी नहीं मिली है।

जानकारों का कहना है कि 2005 से 2010 तक करीब 152 कर्मचारियों को नियमितिकरण या समायोजन किया गया है। यह समस्या विद्यापीठ में बैकडोर से बिना विज्ञापन के नियुक्तियों की प्रवृत्ति के कारण पैदा हुई है। इससे पहले भी इसी तरह की अनियमित नियुक्ति को लेकर शासन के कठोर रवैये का शिकार होना पड़ा है। हाल में ही मार्ग व्यय के नाम पर भी तृतीय और चतुर्थ श्रेणी में नियुक्तियां हुईं। जिन्हें बाद में निरस्त कर दिया। इस मामले की अभी विजिलेंस जांच चल रही है।

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