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लड़कियों सा पहनावा लड़कों को भाया

लड़कियों सा पहनावा लड़कों को भाया

बड़े और छोटे शहरों में, कस्बों में आज तमाम युवा लड़के आपको ऐसे दिखेंगे, जिनके बारे में दूर से देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि वह लड़का है या लड़की। उसने लड़कियों की तरह कैप्री पहनी होगी और ऊपर उसी अंदाज का कथित टॉप। कानों में बालियां होंगी और सिर पर छोटी सी चोटी। मनोविज्ञान की भाषा में बेशक इसे क्रॉस ड्रेसिंग कहते हों, लेकिन आज के युवाओं का यही स्टाइल है। सुधांशु गुप्त की रिपोर्ट।

लड़कों की कितनी बातें/आदतें लड़कियों ने अपना ली हैं और लड़कियों की लड़कों ने। पहनावे से ही कुछ पता चलता था उनके ‘ही’ और ‘शी’ होने का। पर युवा अब ड्रेसेज में भी कोई भेदभाव नहीं करना चाहते हैं। लड़कों को प्रयोग के तौर पर लड़कियों द्वारा पहने जाने वाले परिधान पसंद आने लगे हैं।

क्या है क्रॉस ड्रेसिंग

क्रॉस ड्रेसिंग का अर्थ है, जब कोई व्यक्ति (अमूमन पुरुष) अपोजिट सेक्स द्वारा पहने जाने वाले परिधानों को पसंद करता है और उन्हें पहनने लगता है। माना ये जाता है कि जिस तरह अपोजिट सेक्स एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं, उसी तरह दोनों एक दूसरे के परिधानों के प्रति भी आकर्षित होते हैं। कभी-कभी यह आकर्षण इतना अधिक बढ़ जाता है कि व्यक्ति अपोजिट सेक्स के परिधानों को ही अंतिम रूप से चुन लेता है।

क्रॉस ड्रेसिंग के इतिहास की बात करें तो कुछ बातें सामने आती हैं। पहली, अक्सर मांएं अपने नवजात बेटे को लड़कियों की ड्रेसेज पहनाती और उसी तरह सजाती हैं। बालपन तक तो यह ठीक रहता है, लेकिन बच्चों के बड़े होने के बाद कई बार उसके अवचेतन में लड़कियों की ड्रेसेज के प्रति आकर्षण बना रहता है। लिहाजा वह बड़ा होने के बाद भी उस आकर्षण से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाता। बॉलीवुड पर नजर डालें तो फिल्म निर्माण के शुरुआती काल में लड़कियां फिल्मों में आना पसंद नहीं करती थीं, तब पुरुष ही नायिकाओं की भूमिकाएं निभाते थे। कुछ वर्षों पहले तक रामलीलाओं में भी अक्सर सीता की भूमिका लड़के ही करते थे। लंबे समय तक ऐसा करते रहने से व्यक्ति लड़कियों की ड्रेसेज के प्रति आकर्षित हो सकता है। लड़कियों की ड्रेसेज के प्रति आकर्षित होने का एक कारण हार्मोनल डिसबैलेंस भी है। ऐसे व्यक्तियों में लड़कियों के हार्मोन्स होते हैं। वे न केवल लड़कियों के कपड़े पहनना पसंद करते हैं, बल्कि उनका व्यवहार भी लड़कियों की तरह का ही हो जाता है।

तीन तरह के होते हैं क्रॉस ड्रेसर

पहली ऐसे लोगों की श्रेणी है, जो किसी हार्मोनल असंतुलन के कारण लड़कियों के परिधानों की ओर आकर्षित होते हैं। बाद में इन लोगों में शारीरिक बदलाव आने लगते हैं और ये अपना जेंडर बदलवा लेते हैं। ऐसे लोगों में बॉबी डार्लिग जैसे लोग हैं। दूसरा, ऐसे लोग, जो अभिनय करते समय स्त्री रूप में दिखाई पड़ते हैं, जैसे फिल्मों में, विज्ञापनों में या फिर रंगमंच पर। इनके साथ कोई हार्मोनल समस्या नहीं होती। तीसरे ऐसे लोग हैं, जिन्होंने क्रॉस ड्रेसिंग को स्टाइल ही बना लिया है। इनमें आज का युवा शामिल है। ये लोग प्रयोग के लिए और फैशन के लिए ही क्रॉस ड्रेसिंग का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे युवा केवल लड़कियों के परिधानों के प्रति ही आकर्षित नहीं होते, बल्कि उन्हीं की तरह कानों को छिदवाना, लंबी चोटी रखना भी इन्हें खूब सुहाता है। लेकिन ये लोग किसी भी तरह से स्त्रीयोचित नहीं होते।

फैशन की दुनिया में मिलते हैं खूब क्रॉस ड्रेसर

फैशन की राजधानी पेरिस भी इस बात की गवाह रही है कि लड़कियों की ड्रेसेज डिजाइन करते-करते पुरुष फैशन डिजाइनर अक्सर लड़कियों की ड्रेसेज के प्रति भी आकर्षित हो जाते हैं। एक धारणा यह भी है कि ये डिजाइनर जानबूझकर भी लड़कियों की ड्रेसेज को पहनने लगते हैं, ताकि लड़कियों से बेहतर ढंग से मिक्सअप हो सकें। भारत में भी अब यह ट्रेंड कमोबेश दिखाई पड़ने लगा है। बिग बॉस-3 में शामिल हुए रोहित वर्मा अंतरराष्ट्रीय स्तर के फैशन डिजायनर हैं, लेकिन वे खुद भी महिलाओं जैसी ड्रेसेज ही पहनते हैं।

बाजार की जरूरतें

जैसे-जैसे बाजार का विस्तार हो रहा है, बाजार अपने लिए खुद नये रास्ते तलाश रहा है। पहले पुरुष और महिलाओं के परिधान एकदम अलग हुआ करते थे। लेकिन बाजार ने ही यह सोचा कि क्यों न ऐसे परिधान तैयार किये जाएं, जो दोनों के लिए उपयुक्त हों। इसी के चलते जीन्स, टी शर्ट जैसे परिधान बाजार में आए और युवाओं ने इन्हें खूब पसंद किया। फ्री साइज भी इस श्रेणी में बाजार की देन था। यह बाजार ही है जिसने इस भेद को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई कि कुछ परिधान लड़कियों के लिए हैं और कुछ लड़कों के लिए। मजेदार बात है कि फैशन शोज में अब डिजाइनर इस तरह के डिजाइन पेश कर रहे हैं। पिछले दिनों हुए एक फैशन शो में लड़कों के लिए बाकायदा कैप्री और टॉप, स्कर्ट और टॉप जैसी ड्रेसेज पेश की गयीं। हो सकता है आम युवाओं में इस तरह की ड्रेसेज का चलन अभी बहुत ज्यादा न हो, लेकिन आने वाले समय में कम से कम ड्रेसेज के मामले में आपको लैंगिक असमानता देखने को नहीं मिलेगी।

बॉलीवुड में क्रॉस ड्रेसिंग

बॉलीवुड में क्रॉस ड्रेसिंग का लंबा इतिहास रहा है। पहले जहां पुरुष महिलाओं के किरदार निभाते थे, वहीं अब बॉलीवुड के तमाम बड़े नायक कुछेक दृश्यों में महिलाओं के रूप में आना पसंद करते हैं। बिग बी अमिताभ बच्चन से लेकर आमिर खान तक किसी न किसी फिल्म में महिला वेशभूषा में अवश्य दिखाई दिये। दिलचस्प रूप से कमल हसन ने तो चाची 420 फिल्म में पूरी तरह महिला का किरदार निभाया और दर्शकों ने उसे बेपनाह पसंद भी किया। इसी तरह गोविंदा ने आंटी नंबर वन में महिला रूप धरा। इसके अलावा भी तमाम अभिनेता हैं, जो कभी न कभी महिला रूप में परदे पर दिखाई दिये। आमिर खान ने पिछले दिनों एक विज्ञापन किया था, जिसमें वे आधे पुरुष और आधे स्त्री बने थे। इस विज्ञापन को भी दर्शकों द्वारा बेहद पसंद किया गया। बड़े परदे के अलावा छोटे परदे पर भी क्रॉस ड्रेसिंग का ट्रेंड जोर पकड़ रहा है। छोटे परदे पर दिखाये जा रहे कॉमेडी सर्कस में भाग लेने वाले अधिकांश कलाकार अक्सर महिला रूपों में ही दिखाई पड़ते हैं। बेशक इनका मकसद हास्य पैदा करना हो, लेकिन ये भी क्रॉस ड्रेसिंग को ही रिफ्लैक्ट करते हैं।

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