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फूलों से कम हसीन नहीं ये झाड़ियां

फूलों से कम हसीन नहीं ये झाड़ियां

अक्सर हम ऋतु संबंधी फूलों को ही महत्त्व देते हैं। यदि स्थाई झाड़ियों के बारे में भी सोचें तो ये हमारी बहुत बड़ी समस्या को दूर कर देती हैं। कैसे, बता रही हैं प्रतिभा आर्य।

शीत ऋतु समाप्त हो गई है और आश्चर्य नहीं कि आपके बहुत से पौधे जो कुछ समय पहले रौनक दे रहे थे, अब समाप्त हो गए हों। गमले व क्यारियां भी खाली हो गई हों और ग्रीष्म ऋतु की पौध चाहे तैयार क्यों न हो, उनके खिलने में समय हो। कुछ दिन पहले आपकी रंग-बिरंगी बगिया अब एकदम बदरंग सूनी पड़ गई हो। ऐसे समय में ये स्थायी पौधे बगिया को रंग व आकर्षण प्रदान करते हैं और अक्सर हम वार्षिक फूलों के सामने इनकी उपेक्षा कर देते हैं। चाहे छत हो या फिर जमीन, ये स्थाई पौधे वर्ष भर आपको और कुछ नहीं तो हरे रंग की एक शीतल पृष्ठभूमि तो प्रदान करते ही हैं। मेरा तो यह मानना है कि इनका महत्त्व किसी भी सुन्दर वार्षिक फूलों से कम नहीं है, अत: इन्हें भी अपनी बगिया में स्थान अवश्य देना चाहिए।

इनके पक्ष में सबसे महत्त्वपूर्ण बात तो यह है कि इनकी देखभाल में कम मेहनत लगती है, पानी भी कम लगता है व एक ऋतु की समाप्ति व दूसरी ऋतु के बीच के अंतराल को यह अपने फूलों द्वारा भरते हैं। गुडहल, इक्जोरा, चांदनी, रात की रानी, क्रासेन्ड्रा, निनोनिया, मायोनिया, जड्रोफा आदि अनेक ऐसे पौधे हैं, जो वर्ष भर बने रहते हैं और बगिया के खाली स्थान को रंग प्रदान करते रहते हैं। ये पौधे आप गमलों व जमीन दोनों में ही लगा सकते हैं। यदि जमीन काफी अधिक हो तो कनेर, हरी चम्पा, गंधराज जैसी बड़ी झाड़ियां भी एक समूह या क्यारी में लगाई जा सकती हैं। छोटे रास्तों के किनारे लगी ये झाड़ियां रंग व छाया दोनों ही प्रदान करती हैं। विशेषकर जब शीत ऋतु के फूल समाप्त हो जाते हैं और पूरी बगिया सूनी पड़ जाती है, तब ये झाड़ियां रंग व सुगंध प्रदान करती हैं। ये बगिया के सूनेपन को भर देती हैं। सत्य तो यह है कि जितना परिश्रम हम ऋतुओं के फूलों में लगाते हैं उसके मुकाबले में ये स्थाई झाड़ियां अधिक उपयोगी होती हैं।

लोग अक्सर ऋतु संबंधी फूलों को ही महत्त्व देते हैं, परन्तु यदि हम थोड़ा भी सोचें तो ये स्थाई पौधे हमारी बहुत बड़ी समस्या को दूर कर देते हैं। पहले पौध लगाना फिर कम से कम दो माह तक उनके पनपने व खिलने का इंतजार करना, सुबह शाम पानी लगाना, ग्रीष्मकाल में भी उनकी रौनक मात्र दो तीन माह की होती है। फिर यदि आपके यहां पानी की कमी हो तो एक और समस्या पैदा हो जाएगी। कम पानी व मेहनत में अधिक रौनक व आनन्द। आप स्थाई झाड़ियों को अवश्य लगाइए। यदि जगह की कमी हो तो एक आध ही लगा दीजिए। पूरा कोना इस छोटे से वृक्ष से हरा भरा हो जाएगा और आप पाएंगे कि ये आपके लिए बहुत सस्ता सौदा रहेगा।

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