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आमिर ही बन सकते हैं गुरुदत्त: वीके मूर्ति

आमिर ही बन सकते हैं गुरुदत्त: वीके मूर्ति

'कागज के फूल', 'प्यासा' और 'साहिब, बीबी और गुलाम' समेत गुरुदत्त की हर फिल्म में सिनेमेटोग्राफी का जादू बिखेरने वाले दादा साहेब फाल्के पुरस्कार प्राप्त वीके मूर्ति का मानना है कि सिर्फ आमिर खान ही गुरुदत्त के किरदार के साथ न्याय कर सकते हैं।

गुरुदत्त के बेहद करीबी रहे मूर्ति ने बेंगलुरु से दिए इंटरव्यू में कहा कि मुझे जल्दी कोई कलाकार प्रभावित नहीं करता, लेकिन आमिर वाकई तारीफ के काबिल हैं। 'लगान' और 'तारे जमीं पर' को क्लासिक फिल्मों की श्रेणी में रखा जा सकता है। बिना बॉलीवुड फॉर्मूले के कड़ी मेहनत के दम पर फिल्में बनाने और अभिनय के उनके गुण ने मुझे कई बार गुरुदत्त की याद दिलाई है।

सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान पाने वाले इस पहले तकनीशियन ने कहा कि आमिर ही गुरुदत्त के किरदार के साथ न्याय कर पाएंगे। गुरुदत्त के बेहद करीब रहने के कारण उनके व्यक्तित्व की गहराई को मैं बखूबी समझता हूं और इसे पर्दे पर कोई परफेक्शनिस्ट ही उतार सकता है।

गुरुदत्त के जीवन पर बनने वाली फिल्म की स्क्रिप्ट अनुराग कश्यप ने लिखी है और इस महान फिल्मकार के पुत्र अरूण दत्त के अनुसार आमिर से रोल के लिए संपर्क किया गया है, जिन्होंने पढ़ने के लिए स्क्रिप्ट मांगी है।

मूर्ति और गुरुदत्त का रिश्ता इतना गहरा था कि जब तक गुरुदत्त जीवित रहे उन्होंने किसी अन्य निर्देशक के साथ काम नहीं किया। 'चौदहवीं का चांद हो' या 'जाने वो कैसे लोग थे' जैसे गीतों में उनका फिल्मांकन बेहद सराहा गया।

गुरुदत्त को भारतीय सिनेमा का सर्वश्रेष्ठ फिल्मकार मानने वाले 87 वर्षीय मूर्ति ने कहा कि आज के फिल्मकार उस स्तर के करीब भी नहीं पहुंच पाए हैं। गुरुदत्त को सिनेमा की कमाल की समझ थी। आज भले ही भारतीय सिनेमा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितना ही आगे बढ़ गया हो, लेकिन गुरुदत्त के स्तर तक कोई फिल्मकार नहीं पहुंच पाया है। मुझे नहीं लगता कि सिनेमा को कभी दूसरा गुरुदत्त मिल सकेगा।

मूर्ति ने कहा कि गुरुदत्त के निधन के बाद भी मैंने 35 साल तक काम किया, लेकिन आज भी मुझे उन्हीं की फिल्मों के लिए जाना जाता है।
    
मूर्ति ने 'पाकीजा' और 'रजिया सुल्तान' जैसी फिल्मों के अलावा श्याम बेनेगल के धारावाहिक 'भारत एक खोज' और गोविंद निहलानी के धारावाहिक 'तमस' की भी सिनेमेटोग्राफी की। भारतीय सिनेमा में तकनीशियनों की अनदेखी से दुखी मूर्ति को उम्मीद है कि उन्हें मिले फाल्के पुरस्कार से दूसरों के लिए रास्ता खुलेगा।

उन्होंने कहा कि तकनीशियनों को कौन याद रखता है लेकिन मुझे इसी बात का इत्मीनान है कि देर से ही सही, मेरे फन को सराहा गया। कैमरामैन निर्देशक के बाद फिल्म निर्माण में सबसे अहम व्यक्ति होता है जो कैमरे के कैनवास पर सब कुछ उतारता है। इसी तरह फिल्म बनाने में हर तकनीशियन की उतनी ही अहम भूमिका होती है, जितनी कलाकारों की। उम्मीद है कि लोग अब इसे समझेंगे।

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